
जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने गैर इरादतन हत्या का मामला पाते हुए उम्रकैद की सजा को सात वर्ष के कारावास में बदल दिया। मामला शराब के नशे में धुत व्यक्ति की लाठी के प्रहार से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मौत से संबंधित था।
दरअसल, नरसिंहपुर की जिले की गाडरवारा कोर्ट ने हत्या के आरोप में दोषी करार देते हुए मदन ठाकुर को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था। सजा को चुनौती देते हुए मदन ठाकुर ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि अपीलकर्ता का हत्या की घटना को अंजाम देने के कोई इरादा नहीं था। विवाद के कारण उसने टीकाराम के सिर पर लाठी से एक प्रहार कर दिया था। सिर में आई चोट के कारण उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। एक सप्ताह तक उपचार के लिए भर्ती रहने के बाद उसकी मौत हो गयी थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि टीकाराम घटना के समय अपनी दुकान में बैठा हुआ था। इसी दौरान उसकी अपीलकर्ता से विवाद हो गया। जिसके कारण अपीलकर्ता ने लाठी से उसके सिर पर प्रहार किया था। जिसके उपचार के लिए तत्काल तेंदूखेड़ा अस्पताल ले जाया गया था। डाक्टर के बयान अनुसार घायल व्यक्ति शराब के नशे में था। जिसे उपचार के लिए नरसिंहपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया था। एक सप्ताह तक चले उपचार के बाद उसकी मौत हो गयी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रकरण गैर इरादत हत्या का है। इसलिए ट्रायल कोर्ट की सजा को संबोधित करते हुए उसे सात साल के कारावास में परिवर्तित किया जाता है।
