
इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में न्यायमूर्ति गजेन्द्र सिंह की एकल पीठ ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने के आरोपी को सजा पर अपील की अंतिम सुनवाई तक स्थगन देते हुए जमानत का लाभ दे दिया। आरोपी की और से याचिका सुनवाई पर पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव व अधिवक्ता अदिति मनीष यादव ने की। उन्होंने कोर्ट को कहा कि लड़के की शादी के लिए कानूनी उम्र ही नहीं तो शादी का झांसा कैसे जिस पर हाइकोर्ट नहीं सहमति जताई। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि धार जिले के धामनोद थाने में 19 वर्षीय युवती ने 8 सितंबर 20 24 को आरोपी जयेंद्र के खिलाफ 12 जुलाई 2024 की घटना बताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराते बताया था कि उसकी आरोपी से डेढ़ साल से दोस्ती है। मोबाइल पर लगातार बात होती रही और वे एक दूसरे को पसंद करते थे। घटना दिनांक को जयेंद्र मुझे अपने घर ले गया और उसने मेरी मांग भर कर मंगलसूत्र पहना दिया। मेरे साथ संबंध बनाए किंतु बाद में शादी से इंकार कर दिया। रिपोर्टर पश्चात धामनोद थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया तथा प्रकरण सुनवाई करते जिला कोर्ट ने 29 अप्रैल 2025 को आरोपी को 5 साल की सजा सुनाई। इसके खिलाफ आरोपी जयेंद्र ने अधिवक्ता मनीष यादव व अधिवक्ता अदिति मनीष यादव के माध्यम से हाई कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील की। जिस पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता यादव ने तर्क रखे कि आरोपी द्वारा पीड़िता को शादी का झांसा नहीं दिया गया। पीड़िता स्वयं आरोपी से प्रेम करती थी। आरोपी की आयु मात्र 18 साल 7 माह है और पीड़िता 19 साल की है। पीड़िता तो भारतीय कानून के अनुसार विवाह योग्य है परंतु आरोपी 21 वर्ष से कम उम्र का है। इसी स्थिति में आरोपी कानूनन विवाह योग्य ही नहीं है तो फिर शादी का झांसा कैसे दे सकता है। आरोपी अधिवक्ता के तकों से सहमत होकर कोर्ट ने आदेश जारी किया।
