
कलेक्टरों को सौंपा ज्ञापन, 21 जुलाई से आंदोलन की चेतावनी
जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा हाल ही में जिलों में न्यायालयीन और गैर-न्यायालयीन कार्यों के स्पष्ट विभाजन को लेकर जारी निर्देशों के खिलाफ प्रदेश भर में विरोध की लहर उठ खड़ी हुई है। राज्य के तहसीलदार और नायब तहसीलदार इस निर्णय से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं और उन्होंने इसे प्रशासनिक विवेक और प्रक्रिया के विपरीत बताया है।
गुरुवार को मध्यप्रदेश कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के नेतृत्व में तहसीलदारों ने राज्य के विभिन्न जिलों में कलेक्टरों को ज्ञापन सौंप कर शासन के फैसले का विरोध किया। इसी कड़ी में जबलपुर में तहसीलदार शशांक दुबे के नेतृत्व में जिले के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार कलेक्टर दीपक सक्सेना से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
तहसीलदारों का कहना है कि यह कार्य विभाजन बिना किसी विस्तृत अध्ययन, समिति की सिफारिश अथवा पारदर्शी मापदंड के किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्णय में किसी भी प्रकार की तार्किकता और विधिक आधार की कमी है। ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया गया कि किस गणना और किन मानकों के आधार पर सम्भागीय मुख्यालय के जिलों में 14 तथा अन्य जिलों में 8 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को गैर-न्यायालयीन कार्यों के लिए चिन्हित किया गया है, जबकि दिशा-निर्देश इस संबंध में पूरी तरह मौन हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्य विभाजन 11 जून को आयोजित राजस्व विभाग की पाक्षिक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रमुख राजस्व आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर किया गया है। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों द्वारा तहसीलदारों के कार्यों का पुनर्वितरण किया गया।
संघ की चेतावनी..
प्रशासनिक सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र सिंह चौहान के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शासन ने तहसीलदारों की मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया, तो 21 जुलाई से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की अगली रणनीति पर अमल किया जाएगा। संघ ने कहा, गुरुवार का ज्ञापन केवल शुरुआत है और आने वाले समय में विरोध और तेज किया जाएगा यदि शासन ने उचित संवाद की पहल नहीं की।
