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श्रेणी सुधार हेतु 12वीं की परीक्षा फिर देने वाले छात्रों के मामले में सिंगल बेंच के फैसले को पलटा
इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की युगल पीठ ने स्कूल द्वारा छात्रों की फीस लौटाने के एकल पीठ के निर्णय के विरूद्ध लगाई गई माध्यमिक शिक्षा मंडल की याचिका स्वीकार करते एकल पीठ के निर्णय के उलट दिया। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकंडरी एज्युकेशन, नईदिल्ली (आईसीएसई) से 12वीं की परीक्षा बी श्रेणी में पास करने वाले छात्र ऋग्वेद एवं एक अन्य ने अपनी श्रेणी सुधारने के लिए पायोनियर स्कूल (शाजापुर) में एमपी बोर्ड ऑफ सेकंडरी एज्युकेशन के माध्यम से परीक्षा के लिए एडमिशन ले परीक्षा फार्म भरा, लेकिन परीक्षा के पूर्व माशिमं द्वारा यह कहते हुए इन्हें रोक दिया गया कि नियम के मुताबिक केवल एमपी बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एज्युकेशन से पूर्व में 12वीं की परीक्षा देने वाले छात्र ही श्रेणी सुधार हेतु पुनः परीक्षा देने के लिए पात्र हैं। इस पर दोनों छात्रों ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की जिस पर बहस के बाद एकल पीठ ने अपने निर्णय में कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने एडमिशन के पूर्व कोई तथ्य छुपाए नहीं थे। यदि नियम नहीं था तो स्कूल को एडमिशन नहीं देना था वहीं फार्म स्वीकार करते समय माशिमं ने भी कोई आपत्ति नहीं ली। कोर्ट ने संबंधित स्कूल को निर्देश दिया कि वह दोनों याचिकाकर्ताओं से प्राप्त पूरी फीस माध्यमिक शिक्षा मंडल को दो माह की अवधि के भीतर भेज दे, साथ ही स्कूल पर पांच पांच हजार रुपए कॉस्ट लगा कोर्ट ने इनके रिजल्ट घोषित कर मार्कशीट जारी करने के निर्देश भी दिए। इस निर्णय के विरूद्ध माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा दायर अपील याचिका पर सुनवाई करते माशिमं की ओर से एडवोकेट मिनी रवींद्रन के तर्क सुनने के बाद युगल पीठ ने कहा कि माशिमं एक वैधानिक प्राधिकारी है। उसके कानून के विपरीत कार्य करने के निर्देश जारी नहीं किए जा सकते है। और एकल पीठ के निर्णय के पलट दिया।

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