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विशेष न्यायधीश लोकायुक्त का फैसला
जबलपुर। विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए संभागीय पेंशन कार्यालय, कलेक्ट्रेट परिसर, जबलपुर के सहायक पेंशन अधिकारी चैतन्य सराफ का दोष सिध्द पाया। इसी के साथ चार वर्ष के कारावास की सजा सुना दी। साथ ही 10 हजार का जुर्माना लगाया।
अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने दलील दी की शिकायतकर्ता रविंद्र कुमार मिश्र ने 31 अगस्त, 2021 को पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त के समक्ष लिखित शिकायत की थी। जिसमें बताया था कि वह कार्यालय विकास खंड शिक्षा अधिकारी, पाटन में सहायक ग्रेड-टू के पद पर कार्यरत है। संकुल केंद्र बालक, पाटन के शिक्षकों की सेवा पुस्तिका में सातवें वेतनमान का अनुमोदन होना था। इस कार्य के लिए जब वह आरोपित से मिला तो आरोपित उससे प्रति सेवा पुस्तिका 500 रुपये के हिसाब से कुल 19000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है। शिकायत पर लोकयुक्त संगठन, जबलपुर द्वारा कार्यवाही करते हुए आरोपित को एक सितंबर, 2021 को संभागीय पेंशन कार्यालय जबलपुर में 19000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया।
शिकायत व साक्षी पक्षद्रोही फिर भी हुई सजा …
इस मामले में सबसे खास बात यह कि शिकायतकर्ता व साक्षी पक्षद्रोही हो गए थे। इसके बावजूद अभियोजन ने दलील दी कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोप प्रमाणित करने काफी हैं। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्य से आरोप सिद्ध पाते हुए सजा सुना दी। मामले में अभियोजन की ओर से 10 व आरोपित की ओर से सात गवाहों का परीक्षण कराया गया था।

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