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नहीं तो अंडरट्रायल आरोपियों को जमानत देने पर होंगे मजबूर
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के मामलों की तेज सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट और अलग इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। जल्द नहीं बनाया गया, तो अदालतें आरोपियों को जमानत देने पर मजबूर होंगी।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने शुक्रवार को कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकारें टाइम से सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट नहीं बनातीं, तो अदालतों के पास अंडरट्रायल आरोपियों को जमानत देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। कोर्ट एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोपी सालों से जेल में बंद है, जबकि अभी तक मुकदमे की सुनवाई शुरू भी नहीं हुई थी।
तेज सुनवाई के लिए अलग विशेष अदालतें जरूरी
कोर्ट ने कहा कि यूएपीए और एमसीओसीए जैसे गंभीर मामलों में तेज सुनवाई के लिए अलग विशेष अदालतें जरूरी हैं। कोर्ट ने एनआईए सचिव के हलफनामे पर भी नाराजगी जताई और कहा कि उसमें कहीं यह नहीं बताया गया कि ट्रायल में तेजी लाने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी विशेष मामलों में धीमी सुनवाई पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा कि जब एक व्यक्ति सालों से जेल में है और मुकदमा शुरू ही नहीं हुआ, तब जमानत देना या न देना, सीधे संविधान के अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन बन जाता है।

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