
इंदौर। हाईकोर्ट ने फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए हैं। इंदौर खंडपीठ में एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि उस पर गंभीर मारपीट का आरोप था, लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ सिर्फ मामूली धाराओं में केस दर्ज किया। कोर्ट ने इस पर हैरानी जताकर कहा कि पुलिस का यह रवैया चिंताजनक है, खासकर जब मामला गंभीर हो।
जिस व्यक्ति के साथ आरोपी पक्ष द्वारा मारपीट की गई, उस फरियादी के गंभीर चोटों से संबंधित फोटो भी पुलिस ने नहीं लिए। हाई कोर्ट जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने डीजीपी को आदेश दिए मारपीट के मामले में किसी व्यक्ति को चोट लगती है, तब पुलिस थाने में उसकी फोटो भी ली जाए। इससे कोर्ट भी देख सके कि जिसने जमानत के लिए अर्जी लगाई है, उस पर किन धाराओं में केस दर्ज हुआ है।
कोर्ट ने कहा, प्रदेश में पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह के मामलों में रैंकिंग पैटर्न अपना रखा है। गंभीर चोट के मामले में भी हल्की धाराओं में केस दर्ज हो रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को सख्त हिदायत दी कि सभी मामलों में पुलिस अधिकारी और डॉक्टर घायल की तस्वीर लें। कोर्ट ने कहा एक ओर पुलिस पूरे मामले को गंभीर मान रही थी लेकिन इसी मामले में मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज हुआ।
अधिवक्ता के मुताबिक गंभीर चोट लगने के बाद एमएलसी की जाती है। रिपोर्ट में चोट की गंभीरता का जिक्र नहीं किया जाता है। शरीर के जिस हिस्से में चोट लगती है, उसके बारे में लिख दिया जाता है। फोटो अनिवार्य करने से पुलिस और मेडिकल अधिकारी बंध जाएंगे।
