भारतीय क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में एक जुलाई, 2024 से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं
अपराध साबित होने पर 10 साल की जेल की हवा खानी पड़ेगी

दमोह । अब शादी, रोजगार या पदोन्नति का झूठा वादा कर महिला से यौन संबंध बनाना बेहद महंगा पड़ेगा। अपराध साबित होने पर 10 साल की जेल की हवा खानी पड़ेगी। यह संभव हुआ है, देश में एक जुलाई से लागू हुए तीन नये आपराधिक कानूनों से। जिन्हें लेकर हाई कोर्ट व जिला अदालत के वकीलों के बीच वाद-विवाद-संवाद का माहौल सरगर्म है।
हाई कोर्ट व जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आपराधिक प्रकरणों में बहस करने में माहिर क्रिमनल लायर्स का कहना है कि वे तीनों नए कानूनों की पुस्तकों को ठीक से पढ़ चुके हैं। इसी के साथ उन्होंने पुरानी धाराओं को स्थापन्न कर स्थापित नवीन धाराओं को याद कर लिया है। उन्हीं के अनुरूप केस दायर करने लगे हैं। साथ ही बहस के दौरान भी उन्हीं धाराओंका उच्चारण करने लगे हैं। न्यायाधीश भी यह देखकर मनोबल बढ़ा रहे हैं। न्यायविद व विधिवेत्ता मिलकर नवीन कानूनों के हिसाब से सुनवाई का वातावरण तैयार कर रहे हैं। दरअसल, महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में सजा सख्त हुई है। इसी आधार पर माना जा रहा है कि नवीन आपराधिक कानूनों में महिलाओं के हित के लिए नियमों में बदलाव बेहतर है।
नए कानून वास्तव में पुराने कानूनों का पुनर्गठन
भारतीय क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में एक जुलाई, 2024 से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। इन नए कानूनों को पुराने कानूनों का पुनर्गठन कहा जा सकता है और ये लगभग 80 प्रतिशत एक से ही है। कुछ नए बदलाव जैसे टेक्नोलाजी के यूज को बढ़ावा, ट्रायल के दौरान निश्चित समय-सीमा तय होना एक बेहतर पहल साबित हो सकती है। नए कानून के आने से केसेस की पेंडेंसी में भी बढ़ावा होने की सम्भावना है। साथ ही साथ जुरीसप्रूडेंस के डेवलपमेंट में भी समय लगना निश्चित है। आम आदमी की सुगमता हेतु भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में जीरो एफआइआर के प्रविधान को सम्मलित करना एक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण निर्णय है। इस नए कानून के जरिए अब एफआइआर किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जा सकती है।
कानूनी सुधार आवश्यक था
बदलते वक्त के साथ कानूनी सुधार आवश्यक था। इन नए कानूनों के लागू होने के बाद काफी कुछ बदल गया है। भारतीय न्याय संहिता में महिलाओं से जुड़े अपराधों में भी सख्त सजा का प्रविधान किया गया है। शादी का वादा कर संबंध बनाने वालों को 10 साल की सजा का प्रविधान है। दुष्कर्म के लिए 10 से 20 साल से लेकर फांसी तक की सजा का प्रविधान है। 16 साल से कम उम्र की लडक़ी के साथ दुष्कर्म का दोषी पाए जाने पर कम से कम 20 साल की सजा का प्रविधान किया गया है। बीएनएस की धारा 65 में ही प्रविधान है कि अगर कोई व्यक्ति 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया जाता है तो उसे 20 साल की जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। भारतीय न्याय संहिता में एक नई धारा 69 जोड़ी गई हैं इसमें शादी, रोजगार या प्रमोशन का झूठा वादा कर महिला के साथ यौन संबंध बनाता है तो उसे 10 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसमें पहचान छिपाकर शादी करने पर भी 10 साल की सजा का प्रविधान किया गया है। इसी तरह दहेज हत्या में सजा का भी नया प्रविधान हुआ है।
