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संपत्ति कुर्की के नोटिसों से भी नहीं पड़ रहा फर्क, पीएम आवास की राशि लेकर भी नहीं बनाए मकान
छिंदवाड़ा। शहर के २०० से अधिक डिफाल्टरों ने निगम को करोड़ों रूपए की चपत लगा दी है। दरअसल यह वह डिफाल्टर है जिन्होंने निगम से मकान बनाने के नाम पर पैसा तो लिया लेकिन ना तो मकान बनाए और न ही अब पैसा लौटाने की सोच रहे है। निगम द्वारा इन डिफाल्टरों को नोटिस भी जारी किए जा रहे है लेकिन अब वह इन नोटिसों का जवाब देना भी उचित नहीं समझ रहे है। दरअसल वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शहरों में निवासरत ऐसे लोग जिनका कच्चा मकान था, उसे पक्का बनाने के लिए ढाई लाख रूपए की राशि प्रदान करने की महत्वकांक्षी योजना शुरू की थी। जिसके चलते शुरूआत में चार से पांच डीपीआर में शहर के हजारों हितग्राहियों ने इसका लाभ लिया। उनके कच्चे मकान अब पक्के मकान के रूप में तब्दील हो गए है। वहीं कुछ हितग्राहियों ने पक्का मकान होने के बाद भी उस समय निगम के कुछ कर्मचारियों के साथ सांठगांठ कर फर्जीवाड़े को भी अंजाम दिया था। इसके उपरांत सबसे अधिक मौज उन हितग्राहियों ने की जिन्होनें बाद की डीपीआर में अपने प्रकरण स्वीकृत कराकर निर्धारित ढाई लाख की राशि तो हासिल कर ली, लेकिन इसके बाद 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी मकान नहीं बनाया है। जब समय बीत जाने के बाद नगर निगम द्वारा हितग्राहियों से सपंर्क किया जा रहा है तो यह टलामटौली जैसे जवाब दे रहे है। वहीं पैसे अन्य जगह खर्च होने की बात कह रहे है।
नोटिसों का भी नहीं कोई फर्क
इन डिफाल्टरों को निगम द्वारा लगातार नोटिस जारी किए जा रहे है लेकिन यह नोटिसों का कोई जवाब नहीं दे रहे है। ऐसे में निगम कर्मचारियों द्वारा हितग्राहियों के घर पहुंचकर राशि सरेंडर करने की बात भी कही गई लेकिन तब भी हितग्राहियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इन डिफाल्टर हितग्राहियों को तहसीलदार स्तर एवं इसके उपरांत एसडीएम कोर्ट से भी संपत्ति कुर्की का वारंट भी जारी किया गया लेकिन जब भी इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। वर्तमान में 242 ऐसे डिफाल्टर है, जो कि निगम की करोड़ों की राशि दबाए बैठे है।

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