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जबलपुर से ट्रेन में सवार होकर मस्ती में गुना पहुंचे थे दोनों बच्चे
गुना। जिले में बाल सुरक्षा और संवेदनशीलता के क्षेत्र में गुना पुलिस की तत्परता एक बार फिर सामने आई है। गुना रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिले दो नाबालिग बच्चों को विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की संयुक्त कार्रवाई के चलते उनके परिजनों से सकुशल मिलाया गया। यह घटना न केवल पुलिस की सतर्कता का उदाहरण है, बल्कि समाज के प्रति उसके दायित्वबोध और मानवीय दृष्टिकोण को भी दर्शाती है। जानकारी के अनुसार, 27 जुलाई की सुबह गुना रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर दो मासूम बालक एक लगभग 8 वर्षीय और दूसरा 7 वर्षीय लावारिस अवस्था में देखे गए। इसकी सूचना 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से विशेष किशोर पुलिस इकाई को मिली। सूचना मिलते ही एसजेपीयू की टीम ने तत्काल आरपीएफ की मदद से दोनों बच्चों को अपने संरक्षण में लिया और उन्हें जिला चिकित्सालय परिसर स्थित मां स्वरूपा आश्रम में सुरक्षित आश्रय प्रदान किया।
बच्चों की काउंसलिंग के दौरान एसजेपीयू के अधिकारी अनिल सिंह तोमर को पता चला कि दोनों बच्चे जबलपुर जिले के चार खंभा क्षेत्र के निवासी हैं और मस्ती-मजाक में ट्रेन में बैठकर अनजाने में गुना पहुंच गए थे। इसके बाद पुलिस ने तत्काल बच्चों के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें सूचित किया गया कि उनके बच्चे गुना में सुरक्षित हैं। दो दिन बाद, 29 जुलाई को परिजन गुना पहुंचे और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की प्रक्रिया के तहत बच्चों को विधिवत रूप से सुपुर्द किया गया। इस कार्य में विशेष किशोर पुलिस इकाई से अनिल सिंह तोमर, आरपीएफ से सहायक उपनिरीक्षक विनोद सिंह, मां स्वरूपा आश्रम के प्रबंधक नरेंद्र धाकड़, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नीरू शर्मा तथा सदस्यगण अनसुइया रघुवंशी, सुधाकर शर्मा, रेणु मिश्रा और रविंद्र रघुवंशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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