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हाई कोर्ट ने निरस्त कर दी याचिका
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायामूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने वह जनहित याचिका निरस्त कर दी, जिसमें विशेष परियोजना के तहत हुई नियुक्तियों को कटघरे में रखा गया था। कोर्ट ने सुनवाई दौरान पाया कि उक्त याचिका सिर्फ एक व्यक्ति को लेकर है, जिसकी नियुक्ति संविदा आधार पर की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया सेवा संबंधी मामले में जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उक्त मत के साथ दायर जनहित याचिका निरस्त कर दी।
यह जनहित याचिका पन्ना निवासी एडवोकेट नंदकिशोर अहिरवार की ओर से दायर की गई थी। जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2011 में कुछ व्यक्तियों को एक विशेष परियोजना के लिए नियुक्त किया गया था और परियोजना पूरी होने के बाद उन्हें विभिन्न विभागों में संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया है। मामले की सुनवाई दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता एक अधिवक्ता है और वर्तमान याचिका के विषय-वस्तु वाले किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं है। याचिका में याचिकाकर्ता ने कई व्यक्तियों में से एक व्यक्ति का नाम लिया है, जिन्हें संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया है। अनुबंध के आधार पर। ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता का उक्त व्यक्ति के साथ कोई व्यक्तिगत विवाद है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका उन व्यक्तियों के लिए है, जो कि ज्ञान, वित्तीय क्षमता या अन्य किसी भी प्रकार की सहनशीलता की कमी के कारण अपने हितों या अधिकारों की रक्षा करने में असमर्थ हैं। जनहित याचिकाकर्ता इस याचिका में शामिल किसी भी सार्वजनिक तत्व को प्रस्तुत नहीं कर पाया है। इसके अलावा यह याचिका कर्मचारी की सेवा शर्तों से संबंधित है और यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि सेवा संबंधी मामले में जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उक्त मत के साथ कोर्ट ने दायर जनहित याचिका निरस्त कर दी।

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