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कोर्ट ने कहा- जब तक जानबूझकर या अपमान की मंशा से ऐसा न किया हो
कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसला में स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद राष्ट्रीय ध्वज को सूर्यास्त के बाद न उतारने के आरोप में दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। यह मामला अंगमाली नगरपालिका के पूर्व सचिव वीनू सी कुंजप्पन के खिलाफ दर्ज किया गया था, जिन पर भारतीय ध्वज का अपमान करने का आरोप था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति काउसार एदप्पागथ की सिंगल बेंच ने साफ कहा कि जब तक जानबूझकर और अपमान की मंशा से ऐसा न किया गया हो, तब तक ध्वज को सूर्यास्त के बाद न उतारना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब तक राष्ट्रीय ध्वज का अपमान या अनादर करने की मंशा के साथ कोई जानबूझकर किया गया कृत्य न हो, तब तक धाराएं लागू नहीं की जा सकती हैं। इस मामले में कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला है जो यह साबित करे कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर ध्वज नहीं उतारा।
बता दें बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक 15 अगस्त 2015 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अंगमाली नगरपालिका परिसर में भारतीय ध्वज फहराया गया था। आरोप है कि सचिव कुंजप्पन की उपस्थिति में फहराया गया यह ध्वज सूर्यास्त के बाद भी नहीं उतारा गया और 17 अगस्त दोपहर तक लहराता रहा। इसको लेकर अंगमाली पुलिस ने स्वयं संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की थी।
कोर्ट ने कहा कि 1971 के अधिनियम की धारा 2 में जिन कृत्यों को अपमानजनक माना गया है उनमें ध्वज को सूर्यास्त के बाद न उतारना शामिल नहीं है। इसमें ध्वज को जलाना, फाड़ना, जमीन पर गिराना, या उसका अनुचित उपयोग करने जैसे कृत्यों को शामिल किया गया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि फ्लैग कोड इंडिया, 2002 कोई वैधानिक कानून नहीं है बल्कि यह केंद्र सरकार की ओर से जारी कार्यकारी निर्देश हैं। ऐसे निर्देशों का उल्लंघन अपने आप में आपराधिक दंड का आधार नहीं बन सकता, जब तक कोई अलग वैधानिक प्रावधान न हो।
कोर्ट ने कहा कि फ्लैग कोड, 2002 एक आचार संहिता है, न कि संविधान के तहत परिभाषित कोई कानून। अतः इसका उल्लंघन दंडनीय नहीं है जब तक कि अपमान की स्पष्ट मंशा न हो। कोर्ट ने पाया कि पूर्व सचिव कुंजप्पन के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो यह दर्शाए कि उन्होंने जानबूझकर या अपमान की नीयत से ध्वज नहीं उतारा। इस आधार पर हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

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