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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में बने नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में राजद्रोह से जुड़ी धारा 152 को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इसकी संवैधानिक वैधता यानी संविधान के अनुसार सही होने पर विचार करेगा।
दरअसल याचिका सेना से रिटायर्ड मेजर जनरल एस.जी. वोम्बटकेरे ने दायर की है। उन्होंने कहा है कि बीएनएस की धारा 152, पुराने राजद्रोह कानून की तरह ही है, बल्कि यह उससे भी ज्यादा सख्त, खतरनाक और अस्पष्ट है। सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने याचिका पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने याचिका में उस पुराने मामले से जोड़ने का आदेश भी दिया है जिसमें पहले से आईपीसी के राजद्रोह कानून को चुनौती दी गई थी। इस मुद्दे पर अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दलील दी हैं कि यह नया कानून भी पुराने कानून जैसा है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 19(1)(ए) (अभिव्यक्ति की आजादी) और अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। इसमें इस्तेमाल किए गए शब्द (जैसे जानबूझकर या इरादे से) ठीक से परिभाषित नहीं हैं, जिससे सरकार इनका गलत इस्तेमाल कर सकती है। यह कानून असहमति और आलोचना की आजादी को दबा सकता है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
पुराने कानून पर कोर्ट ने रोक लगाई थी
इसके पहले जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने पुराने राजद्रोह कानून पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि जब तक इस कानून की समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक कानून को लागू नहीं किया जाएगा। नए कानून (बीएनएस) में वही प्रावधान नए नाम और नई भाषा में फिर से लाए गए हैं।

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