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जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में कहा कि नाबालिग अवस्था में किए गए मामूली अपराध के आधार पर नियुक्ति के लिए अयोग्य करार नहीं दे सकते। चूंकि अपराध गंभीर नहीं था लिहाजा याचिकाकर्ता को लिखित व शारीरिक परीक्षा के अधार पर नियुक्ति प्रदान की जाए। याचिकाकर्ता सतना निवासी पुष्पराज सिंह की ओर से दलील दी गई कि सेना भर्ती कार्यालय जबलपुर में सैनिक के पद नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। लिखित व शारीरिक परीक्षा में सफल होने के बावजूद भी उसे इस आधार पर अयोग्य ठहरा दिया गया कि उसने नाबालिग अवस्था के दौरान हुए एक अपराधिक प्रकरण की जानकारी प्रस्तुत नहीं की। याचिकाकर्ता ने नाबालिग होने के दौरान मई 2017 में अपने साथी के साथ मिलकर एक युवक के साथ गाली-गलौज की थी। याचिकाकर्ता के विरुद्ध किशोर न्याय बोर्ड में आपराधिक प्रकरण की सुनवाई थी। याचिकाकर्ता द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने पर किशोर न्याय बोर्ड ने एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया था। याचिकाकर्ता का चयन सशस्त्र बल में नहीं हुआ है, इसलिए मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के द्वारा की गई। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि किशोरावस्था में हुए अत्यंत मामूली अपराध का खुलासा नहीं किये जाने के कारण याचिकाकर्ता को अयोग्य नहीं माना जाना चाहिये। हाई कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता के लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षण के परिणाम के आधार पर एक महीने के भीतर नियुक्ति संबंधित कार्यवाही की जाए।

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