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चिप मिनिस्टर’ देवेंद्र फडणवीस चुनाव आयोग के दलाल हैं या वकील? आयोग से सवाल किए जाते हैं, तो जवाब बीजेपी क्यों देती है?

बिना उच्चस्तरीय जांच के राहुल गांधी पर हमला क्यों?
मुंबई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग की मदद से बीजेपी द्वारा की गई वोट चोरी का खुलासा दस्तावेजों और सबूतों के साथ किए जाने के बाद पूरे देश में तहलका मच गया है। राहुल गांधी के इस बड़े खुलासे के बाद शुक्रवार को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में सड़कों पर उतरकर तीव्र आंदोलन किया। मुंबई के दादर में ‘रास्ता रोको’ कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और बीजेपी सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। तकरीबन एक घंटे तक रास्ता रोको चला। इस आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन जोशी, राजन भोसले, किशोर कन्हेरे, मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे, अनंत गाडगीळ समेत सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। आंदोलन से पहले तिलक भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने चुनाव आयोग और बीजेपी की तीव्र आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने बेहद तर्कसंगत ढंग से चुनावी घोटाले की परतें खोलीं और यह बताया कि किस तरह लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। यह घोटाला पूरी तरह उजागर होने के बावजूद सरकार ने न ही कोई एसआईटी गठित की, न ही सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज से जांच कराई। उल्टा राहुल गांधी से ही हलफनामा दाखिल करने की मांग की जा रही है, जो कि पूरी तरह हास्यास्पद और असंवैधानिक है। हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि चुनाव आयोग की 1960 की नियमावली के अनुसार यदि कोई आपत्ति या शिकायत आती है तो नियम 17/18/19 के तहत तत्काल जांच होनी चाहिए। फिर अब तक जांच क्यों नहीं की जा रही?

  • देवेंद्र फडणवीस ‘चिप मिनिस्टर’!
    राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग का पर्दाफाश किए जाने के बाद बीजेपी के नेता बेहद निम्न स्तर की भाषा का प्रयोग करते हुए राहुल गांधी पर हमलावर हो गए हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के बारे में जो भाषा इस्तेमाल की, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि वे चुनाव आयोग के दलाल हैं, वकील हैं या फिर प्रवक्ता!
    उनकी बातों से अहंकार नहीं, बल्कि अहंकार की बदबू आती है। वो ‘Chief Minister’ नहीं बल्कि ‘Chip Minister’ हैं। जब भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं, तभी बीजेपी और देवेंद्र फडणवीस की बेचैनी क्यों बढ़ जाती है? गृहमंत्री अमित शाह और फडणवीस को चुनाव आयोग का बचाव करने की जल्दी क्यों होती है? क्योंकि “दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है!” राहुल गांधी ने जो घोटाला उजागर किया है, उससे चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच के गठजोड़ की परतें उघड़ जाएंगी- यही डर फडणवीस और बीजेपी को सताता है।
  • “कांग्रेस ने पहले आपत्ति क्यों नहीं जताई?”
    इस सवाल पर जवाब देते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि बीजेपी इस तरह के सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि मतदान के दौरान और बाद में भी कांग्रेस ने समय रहते आपत्तियां दर्ज की थीं।
    पराजित उम्मीदवारों ने इस संबंध में उच्च न्यायालयों में याचिकाएं भी दाखिल की हैं और चुनाव आयोग को सबूत भी सौंपे गए थे। मगर बीजेपी इन तथ्यों से ध्यान भटकाने के लिए सिर्फ बौद्धिक भ्रम की राजनीति कर रही है।
  • राज्यभर में कांग्रेस का आंदोलन तेज़ होगा…
    मतचोरी के खिलाफ अब महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी पूरे राज्य में व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। रैलियों, पदयात्राओं और जनसंवाद यात्राओं के माध्यम से लोगों तक सच्चाई पहुंचाई जाएगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी।

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