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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत के रूप में ली थी, जबकि उनका दावा है कि उन्होंने इसके लिए 7.5 करोड़ का भुगतान किया था। यह जमीन बाद में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को 58 करोड़ में बेच दी गई।ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, ओंमकारेश्वर प्रोपर्टीस प्रालि (ओपीपीएल) ने यह जमीन स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी प्रालि (एसएलएचपीएल) को बिना भुगतान के दी, ताकि रॉबर्ट वाड्रा अपनी व्यक्तिगत पहुंच का इस्तेमाल कर हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से ओपीपीएल को हाउसिंग लाइसेंस दिला सकें। चार्जशीट में कहा गया है कि वाड्रा, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद होने के कारण हुड्डा पर व्यक्तिगत प्रभाव रखते थे।
जमीन की रजिस्ट्री 12 फरवरी 2008 को हुई थी, जिसमें 7.5 करोड़ का भुगतान चेक नंबर 607251 से दिखाया गया। लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। भुगतान छह महीने बाद किसी अन्य चेक से किया गया। यह चेक (एसएलएचपीएल) का था, न कि खरीददार कंपनी (एसएलएचपीएल) का। ईडी ने वाड्रा से जुड़े कम से कम तीन महंगी संपत्तियां अटैच की हैं, जिनका जिक्र प्रियंका गांधी ने नवंबर 2024 में वायनाड से लोकसभा चुनाव के समय दिए गए शपथपत्र में नहीं किया। केरल हाईकोर्ट ने इस मामले पर प्रियंका को नोटिस जारी किया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, चुनावी हलफनामे में झूठी या अधूरी जानकारी देना भ्रष्ट आचरण माना जाता है, जिसके लिए अयोग्यता और जेल की सजा भी हो सकती है।

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