जबलपुर। ग्वारीघाट स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज के समीप एक उपभोक्ता के घर में लगे स्मार्ट मीटर की तेज़ रफ्तार ने एक बार फिर इन मीटरों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपभोक्ता श्री अग्रवाल ने अपने बिजली बिल में असामान्य वृद्धि देखी, तो उन्होंने संदेह के आधार पर एक चेक मीटर लगवाया। पाँच महीनों तक दोनों मीटरों को साथ चलाने के बाद जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने सभी को चौंका दिया। स्मार्ट मीटर ने कुल मिलाकर लगभग 600 यूनिट अतिरिक्त खपत दर्ज की, जबकि चेक मीटर की रीडिंग उससे करीब 300 यूनिट कम रही। यह अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि स्मार्ट मीटर ने उपभोक्ता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला और वास्तविक खपत से कहीं अधिक यूनिट दर्शाए।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस उपभोक्ता के परिसर में स्मार्ट मीटर को दो बार बदला गया, फिर भी यह अंतर बना रहा। स्मार्ट मीटर रोजाना औसतन पाँच यूनिट से अधिक की खपत दर्ज कर रहा था, जबकि वास्तविक खपत इससे काफी कम थी। इस बात से यह सिद्ध होता है कि यह कोई एक मशीन की तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर एक गंभीर तकनीकी विफलता है, जिसका खामियाजा सीधे आम जनता को उठाना पड़ रहा है।
इस मामले की जानकारी मिलते ही नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सौरभ शर्मा मौके पर पहुँचे और उन्होंने पूरे घटनाक्रम का निरीक्षण किया। श्री शर्मा ने जबलपुर के दक्षिण संभाग के कार्यपालन अभियंता अभिषेक विश्वकर्मा, अर्जुन सिंह, एवं पंकज अग्रवाल, को मौके पर बुलाया. जहां उन्होंने भी स्मार्ट मीटर की रीडिंग में अंतर पाया और तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्मार्ट मीटर को हटवाकर उसकी जगह पर सामान्य डिजिटल मीटर लगवाया। इस मौके पर कांग्रेस पार्टी के रितेश गुप्ता,अनुज श्रीवास्तव, प्रमोद पटेल, राजकुमार सोनी, आनंद यादव, मौजूद रहे.
