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मुंबई। मानवता को शर्मशार करने वाली एवं मानव तस्करी का एक भयावह और सनसनीखेज घटना सामने आई है। खबर है कि मुंबई से सटे वसई के नायगांव में एक वेश्यावृत्ति के धंधे से 12 साल की एक बांग्लादेशी लड़की को छुड़ाया गया। इस नाबालिग पीड़िता द्वारा एनजीओ को दिए गए बयान में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पीड़ित लड़की ने कहा है कि सिर्फ़ तीन महीनों में 200 से ज़्यादा पुरुषों ने उसका यौन शोषण किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस के मानव तस्करी विरोधी दस्ते ने एक्सोडस रोड इंडिया फ़ाउंडेशन और हार्मनी फ़ाउंडेशन की मदद से हाल ही में एक संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान नायगांव (पूर्व) स्थित एक इमारत में छापेमारी की गई। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने पाया कि बांग्लादेश की एक 12 साल की बच्ची को वेश्यावृत्ति में धकेला गया था। अधिकारियों ने उसे सफलतापूर्वक बचा लिया। इस मामले में अब तक दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पुलिस आगे की जाँच कर रही है।

200 से ज़्यादा पुरुषों ने किया यौन शोषण
हार्मनी फ़ाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष अब्राहम मथाई ने कहा, लड़की को पहले गुजरात के नाडियाड ले जाया गया और तीन महीने की अवधि में 200 से ज़्यादा पुरुषों ने उसका यौन शोषण किया। वह अभी किशोरावस्था में भी नहीं पहुँची है, फिर भी देह व्यापार के दानवों ने उसका बचपन छीन लिया। जाँच में पता चला कि स्कूल में एक विषय में फेल होने के बाद, लड़की अपने माता-पिता के डर से अपनी एक परिचित महिला के साथ घर से भाग गई थी। मगर वह महिला उसे भारत ले आई और देह व्यापार में धकेल दिया। मथाई ने इस मामले में सभी आरोपियों की गिरफ़्तारी और कड़ी सज़ा की माँग की है।

प्रलोभन दिखाकर भारत लाया गया
इस बीच, हार्मनी फ़ाउंडेशन की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि स्कूल की परीक्षा में फेल होने के बाद, नाबालिग लड़की को उसके गाँव की एक महिला ने अवैध रूप से पश्चिम बंगाल के कोलकाता ले जाकर उसके जाली दस्तावेज़ बनवाए। फिर उसे मुंबई लाया गया, जहाँ उसे नायगांव में बंदी बनाकर रखा गया। बयान में कहा गया है, नायगांव में वह एक बुजुर्ग व्यक्ति और उसकी पत्नी के साथ रहती थी, साथ ही 7-8 लड़कियां भी थीं। उस व्यक्ति ने उसे इंजेक्शन लगाया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसके बाद से उसे उसकी सहमति के बिना कई अज्ञात ग्राहकों के पास भेजा गया।

हर रेस्क्यू की होती है यही कहानी !
इस संदर्भ में पुलिस आयुक्त निकेत कौशिककहते हैं कि, अब पुलिस पूरे नेटवर्क की तलाश कर रही है। साथ ही, बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने पर भी काम किया जा रहा है। मथाई ने कहा, यह अकेली लड़की नहीं है। जब भी ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन होते हैं, कम से कम एक ऐसी लड़की ज़रूर मिलती है। जब लड़कियाँ अकेली होती हैं, तो लोग मदद के नाम पर उन्हें ठग लेते हैं।

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