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मुंबई। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुसार, केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में तीन न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। तीन नए न्यायाधीशों के नाम अजीत कडेठाणकर, आरती साठे और सुशील घोडेस्वार हैं। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स मीडिया पर पोस्ट करके जानकारी दी कि बॉम्बे हाई कोर्ट में तीन न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से अजीत भगवानराव कडेठाणकर, आरती अरुण साठे और सुशील मनोहर घोडेस्वार को बॉम्बे हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है। बीते 29 जुलाई को हुई एक बैठक में, कॉलेजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए तीन वकीलों के नामों की सिफारिश की थी। यह प्रस्ताव शुरू में बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपने दो वरिष्ठ सहयोगियों के परामर्श से भेजा था। उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति हेतु प्रक्रिया ज्ञापन (एमओपी) के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश को न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रस्ताव प्रस्तुत करना होता है।
यदि मुख्यमंत्री किसी नाम की अनुशंसा करना चाहते हैं, तो वे नियमानुसार उसे मुख्य न्यायाधीश के पास विचारार्थ भेजते हैं। राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर, यथाशीघ्र केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री को नाम की अनुशंसा और दस्तावेजों का एक सेट भेजते हैं। हालाँकि, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से प्रस्ताव प्राप्त होने की तिथि से छह सप्ताह के भीतर केंद्र द्वारा अन्य पृष्ठभूमि जानकारी के साथ प्रस्ताव की समीक्षा की जाती है। इसके बाद प्रस्ताव मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाता है। वे सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों के परामर्श से अंतिम अनुशंसा करते हैं। परामर्श के बाद, मुख्य न्यायाधीश चार सप्ताह के भीतर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री को अपनी अनुशंसा भेजेंगे। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति आदेश पर हस्ताक्षर करते ही, न्याय विभाग के सचिव मुख्य न्यायाधीश को सूचित करते हैं। इसके बाद पत्राचार की एक प्रति मुख्य न्यायाधीश को भेजी जाती है।

विपक्ष ने आरती साठे की नियुक्ति पर उठाए थे सवाल
पूर्व भाजपा नेता और पूर्व प्रवक्ता आरती अरुण साठे को बॉम्बे हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने पर विपक्ष ने भाजपा की आलोचना की थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 28 जुलाई को आरती साठे को बॉम्बे हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की घोषणा के बाद राज्य में राजनीति गरमा गई थी। विपक्ष ने सवाल उठाया था कि क्या इस न्यायाधीश से राजनीतिक मामलों में न्याय मिलेगा?’ यह सवाल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक शरद चंद्र पवार के बेटे रोहित पवार ने उठाया था। जिसके बाद भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने स्पष्ट किया था कि आरती साठे का पार्टी से कोई संबंध नहीं है क्योंकि उन्होंने दो साल पहले भाजपा प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था।

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