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आठ सप्ताह का दिया समय, पहलगाम आतंकी हमले का भी किया जिक्र
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की याचिका पर सुनवाई में केंद्र सरकार से आठ सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले जैसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
सीजेआई बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील से कहा कि आप पहलगाम में जो हुआ उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह टिप्पणी तब आई जब केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चुनावों के बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन जम्मू-कश्मीर की स्थिति को देखते हुए यह मुद्दा अभी नहीं उठाया जाना चाहिए।
मेहता ने कहा कि हमने आश्वासन दिया है कि चुनावों के बाद राज्य का दर्जा बहाल होगा। इस क्षेत्र की स्थिति विशेष है। इसलिए 8 हफ्ते का समय दिया जाए। वरिष्ठ वकील ने कहा कि दिसंबर 2023 में धारा 370 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के आश्वासन पर भरोसा करते हुए राज्य के दर्जे के मुद्दे पर फैसला नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि उस फैसले को आए 21 महीने हो चुके हैं, लेकिन राज्य का दर्जा अब तक बहाल नहीं हुआ है। याचिका कॉलेज शिक्षक जाहूर अहमद भट और कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक ने दायर की है। उनका कहना है कि राज्य का दर्जा न होना नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित कर रहा है।
बता दें अगस्त 2019 में धारा 370 हटाए जाने के साथ ही राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार जल्द जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दे और वहां पूर्ण लोकतांत्रिक ढांचा बहाल करे। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कहा कि इस याचिका पर सरकार का पक्ष सुना जाएगा। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 हफ्ते बाद तय की है। इससे पहले जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने बीते गुरुवार को कहा था कि केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा बहाल करना ‘जरुरी सुधार’ है, न कि ‘रियायत’ और यह मुद्दा क्षेत्रीय हितों से परे है।

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