
पूछा जब किसी का सामान चोरी ही नहीं हुआ तो पुलिस ने चोरी का प्रकरण कैसे बनाया
इन्दौर। उच्च न्यायालय में जस्टिस संजीव कालगांवकर की एकल पीठ ने चोरी के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते पुलिस, विवेचना अधिकारी तथा उनकी पूरी कार्यशैली को ही कटघरे में खड़ा कर आश्चर्य जताते सवाल किया कि किसी की भी आर्थिक स्थिति के बारे में पुलिस तय कैसे कर सकती है ?… कोर्ट ने सख्त लहजे में पुलिस से पूछा कि पुलिस सिर्फ इस आधार पर किसी के घर में घुस कर जबरिया कीमती गहने कैसे जब्त कर सकती है कि इनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है। आरोपी ने अधिवक्ता मनीष यादव व अधिवक्ता करण बैरागी के माध्यम से हाई कोर्ट इंदौर में जमानत याचिका दायर की। एडवोकेट यादव ने सुनवाई में तर्क रखे कि पुलिस ने फर्जी प्रकरण बनाया। बिना नोटिस के घर में घुस कर घर में रखे गहने जब्त किए। इस प्रकरण में कोई फरियादी ही नहीं जिसने पुलिस को बताया हो कि जब्त गहने उसके हैं। ऐसी स्थिति में चोरी का प्रकरण नहीं बनता। तकों से सहमत होकर कोर्ट ने अनुसंधान अधिकारी से सवाल किया कि जब किसी का सामान चोरी ही नहीं हुआ तो चोरी का चालान कैसे पेश कर दिया। पुलिस ने यह तर्क दिया कि इनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि इनके पास इतने गहने हों। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि किसी की आर्थिक स्थिति के बारे में आप कैसे तय कर सकते हैं। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि जब किसी व्यक्ति ने गहनों के बारे में पुलिस में कोई शिकायत नहीं की तब बिना फरियादी के कोर्ट में चालान कैसे पेश कर दिया गया। जब गहने किसके हैं ये ही तय नहीं और न चोरी का प्रकरण बनाकर चोरी का माल जब्त कर लिया। इसलिए चोरी का केस नहीं बनता। इसलिए आरोपियों की जमानत मंजूर की जाती है।
प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि फरवरी 2025 में थाना बोडा जिला राजगढ़ ने पंजाब पुलिस के दल के साथ संदेह के आधार पर ग्राम कड़िया निवासी सोनू सासी के घर दबिश दी थी। परिजनों ने विरोध किया जिस पर पुलिस की हुज्जत भी हुई। हालाकि सोनू की देश के विभिन्न राज्यों में चोरी का आपराधिक रिकार्ड है, इसलिए डर के कारण वह वहां से भाग गया। पुलिस ने उसके घर से काफी मात्रा में सोने चांदी के गहने जब्त कर चोरी और शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रकरण दर्ज कर का सोनू, कमलेश, उसकी पत्नी व अन्य को आरोपी बनाया। सोनू की गिरफ्तारी गत मई में हुई थी। निचली अदालत से जमानत अर्जी निरस्त होने पर सोनू और कमलेश ने अधिवक्ता मनीष यादव व अधिवक्ता करण बैरागी के माध्यम से हाई कोर्ट इंदौर में जमानत याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई उपरांत कोर्ट ने आरोपियों को जमानत का लाभ देते हुए अपने आदेश में उल्लेख किया कि किसी का सामान चोरी ही नहीं हुआ तो चोरी का प्रकरण कैसे बनाया जा सकता है।
