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गांधीनगर। कूनो में लायन पार्क बसाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने जमीन तैयार की। बुनियादी ढाँचे से लेकर पर्यावरणीय अध्ययन तक कई कदम उठाए गए। योजना ये थी कि गिर से शेर लाकर यहाँ बसाए जाएँ और धीरे-धीरे उन्हें कूनो का ‘किंग’ बना दिया जाए। लेकिन ये सपना रिपोर्ट्स में ही दम तोड़ गया। मतलब अब गुजरात के गिर के शेर अब मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क नहीं जाएंगे। सालों से चली आ रही इस लायन पार्क परियोजना पर अब सरकार ने ताला जड़ दिया है। गिर के शेरों को मध्य प्रदेश भेजने का विचार नया नहीं था। इसकी शुरुआत 2008 में हुई थी। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार। राजनीति का तड़का इस योजना में शुरू से ही लगा रहा।
बता दें कि गिर के शेर सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं, बल्कि गुजरात की सामाजिक प्रतिष्ठा और पर्यटन की रीढ़ भी हैं। हर साल लाखों लोग सिर्फ इन शेरों को देखने गिर पहुँचते हैं। अगर शेरों को कूनो ले जाया जाता तो गुजरात का पर्यटन भी प्रभावित होता। अब जबकि योजना रद्द हो चुकी है, गुजरात की यह ‘ब्रांड वैल्यू’ जस की तस बनी रहेगी। कानूनी पेचीदगियां भी सामने आईं। कई याचिकाएँ लगीं, बहसें हुईं और योजना खिंचती रही। दूसरी तरफ, पर्यावरणविदों ने भी सवाल उठाए कि शेरों को उनके प्राकृतिक घर से निकालना कितना सही होगा। वन विभाग ने विस्तृत अध्ययन के बाद माना कि कूनो का मौसम और उसका आर्द्र माहौल शेरों के लिए अनुकूल नहीं है। गिर के सूखे और घने जंगलों की तुलना में कूनो की नमी भरी जलवायु शेरों की सेहत के लिए खतरा बन सकती है। यानी, शेर वहां लंबे समय तक टिक ही नहीं पाएंगे। वन विभाग ने अब अंतिम फैसला सुना दिया है– शेर वहीं रहेंगे जहाँ उनका असली घर है। गिर के जंगल। यही उनकी सुरक्षित जगह है और यही उनका असली साम्राज्य। इसका मतलब है कि गुजरात की पहचान बने ये एशियाई शेर अब कहीं और शिफ्ट नहीं होंगे।

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