
गोपालगंज। शुक्रवार को बिहार के गोपालगंज शहर के गांधी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने किन कारणों से यात्रा निकाली, सभी जानते हैं। वो बोले कि मुझे खुशी है कि आज समूचे देश में बिहार सहित पूरे देश के कोने-कोने में ये सवाल उठ रहे हैं कि इस देश की संवैधानिक संस्था, जो निष्पक्ष, स्वच्छ और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है, और लोकतंत्र की पूरी आस्था, उस संस्था से बंधी हुई है, जब वो संस्था संदेह के घेरे में आई और जब राहुल गांधी ने प्रमाण देकर उन सवालों के बारे में पूछा, देश दुनिया के सामने बताया, कर्नाटक का हवाला दिया तब सामने से कोई जवाब नहीं आया। जब ट्रांसपेरेंसी, एकाउंटेबिलिटी की परवाह किए बिना निर्वाचन आयोग ने पलटवार किया, जब लाखों वोटों की चोरी पकड़ी गई, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पकड़ी गई। तब जनता के अंदर जम्हूरियत में विश्वास बनाए रखने के लिए, सवाल पूछने के लिए और जवाब मांगने के लिए, इस यात्रा को निकाला गया और इस भीषण गर्मी में इस यात्रा के समर्थन में, स्वतः अपार जन समूह, हजारों लाखों नौजवानों ने सड़कों पर आकर इस यात्रा का समर्थन किया।
सचिन पायलट ने कहा कि यह इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि इस देश की जनता वोट चोरी को बर्दाश्त नहीं करेगी, वोटर लिस्ट से, एसआईआर के नाम से, कुछ और हवाला देकर, जानबूझकर, टारगेटेड लोगों के वोट काटना और टारगेटेड वोट जोड़ना, ऐसे अनेक उदाहरण हमने भी दिए, राहुल जी ने भी दिए। बहुत उदाहरण जनता के बीच प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्य निर्वाचन आयोग की जो चयन प्रक्रिया है, उसमें प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस थे, पर बिना वजह उस प्रणाली को बदलकर उसमें प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को शामिल कर दिया गया, ताकि दो इनके बहुमत से जिसको भी आप चाहो मुख्य निर्वाचन आयुक्त आप बना सकते हो।
चुनाव आयोग और केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सचिन पायलट ने पूछा कि इसकी डिमांड किसने रखी थी? क्या कारण थे, किस कोर्ट का आदेश था? पहली बात, निर्वाचन आयोग ने वोटर लिस्ट में जो गड़बड़ियाँ कीं और उसके बाद सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करने का जो निर्णय लिया, वो किसकी दलील थी, किस मतदाता ने मांग रखी थी? आप वोटर लिस्ट पार्टीज़ को नहीं देंगे, और जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेशित किया निर्वाचन आयोग को कि कांग्रेस पार्टी को वोटर लिस्ट दीजिएगा, उसी दिन अपने नियम बदलकर कहा कि हम बाध्य नहीं हैं। हम वोटर लिस्ट नहीं देंगे। आप वोटर लिस्ट देना नहीं चाहते। आप सीसीटीवी फुटेज जो है कैमरा की, उसे नष्ट करना चाहते हो। आप जवाब देना नहीं चाहते, उल्टा आप हलफनामा मांग रहे हो।
श्री पायलट ने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग राहुल जी के कथन पर जाँच करता और निष्पक्ष जाँच के बाद बोलता, ‘हमें कुछ नहीं मिला’, तो मैं मान लेता। लेकिन वो जाँच करने को तैयार नहीं। लाखों-लाख लोगों को अगर वोट से वंचित करने की तैयारी कर रहे हैं, वोट के अधिकार के लिए, इस देश में लोकतांत्रिक प्रणाली को स्थिर रखने के लिए इस देश की निर्वाचन आयोग वाली जो संस्था है, उस संवैधानिक संस्था को नीतिगत तरीके से खोखला करने का जो काम किया जा रहा है, उसके विरोध में तमाम हमारा गठबंधन आज सड़कों पर है, और मुझे खुशी है कि हमारे गठबंधन के सारे जो दल हैं, केवल नेता ही नहीं, बल्कि कार्यकर्ता भी, कंधे से कंधा मिलाकर बिहार की सरकार और केंद्र की सरकार के खिलाफ मजबूती से इकट्ठा हुए हैं।
