
जंतर-मंतर बवाल पर सीजेपी ने झाड़ा पल्ला, पुलिस पर साधा ठीकरा फोड़ा
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुधवार रात हुए भीषण पथराव और बवाल को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने बयान जारी कर घटना से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने हिंसा में अपने समर्थकों के शामिल होने की बात को सिरे से खारिज करते हुए इसका ठीकरा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पुलिस पर फोड़ा है। दीपके ने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे छात्रों का आंदोलन बड़ा होता जा रहा है, इसे बदनाम करने के लिए साजिश के तहत बाहर से असामाजिक तत्वों और गुंडों को भेजा जा रहा है।
मीडिया से बातचीत के दौरान दीपके ने दावा किया कि वे बीते एक महीने से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और तब तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। उन्होंने पुलिस और सत्ता पक्ष की मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शन स्थल के पास पत्थरों से भरे ट्रक लाए जा रहे हैं और भाजपा के लोग आकर पथराव कर रहे हैं, ताकि सीजेपी और आंदोलनकारी छात्रों की छवि खराब की जा सके।
दूसरी ओर, बुधवार रात जंतर-मंतर पर हुए उग्र प्रदर्शन और पथराव में पुलिस प्रशासन को भारी नुकसान पहुंचा है। उपद्रवियों द्वारा किए गए हमले में कम से कम दो सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और चार पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, शाम के वक्त हुए पहले पथराव में पंजाबी बाग उपमंडल में तैनात एसीपी जय प्रकाश के माथे पर पत्थर लगा, जिससे वे चोटिल हो गए। इसके बाद देर रात फिर से पुलिस बल को निशाना बनाया गया, जिसमें एक अन्य एसीपी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत प्राथमिक इलाज के बाद एम्स में भर्ती कराया गया है।
एक तरफ जहां सीजेपी प्रमुख हिंसा फैलाने वालों को बाहरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस द्वारा की जा रही कानूनी कार्रवाई का सीजेपी और अन्य राजनीतिक दलों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। इससे पहले भी 20 जुलाई को हुई हिंसा के सिलसिले में हिरासत में लिए गए लोगों को छुड़ाने के लिए विपक्षी नेता थाने पहुंचे थे। इसके अलावा, पिछले 26 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के समक्ष शर्त रखी है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई न की जाए। फिलहाल पुलिस उपद्रवियों की पहचान करने और स्थिति को नियंत्रण में लाने में जुटी हुई है।
