Spread the love

इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में हत्या के आरोपी की जमानत हेतु दायर याचिका पर सुनवाई करते अपर सेशन जज को समानता के आधार पर जमानत दिए जाने की गाइड लाइन का अवलोकन कराने का आदेश दे आरोपी को जमानत दे दी है। अपर सेशन जज ने हत्या के एक ही मामले में आरोपियों में से एक आरोपी को तो जमानत दे दी जबकि दूसरे की खारिज कर दी वहीं अपर सेशन जज ने जमानत आवेदन खारिज किए जाने का कोई कारण का भी अपने आदेश में उल्लेख नहीं किया था। इसके खिलाफ ही आरोपी की ओर से उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में जमानत अपील दायर की गई। जिसमें कोर्ट ने इंदौर जोन के निरीक्षण जज को आदेश दिया है कि अपर सेशन जज को समानता के आधार पर जमानत दिए जाने की गाइडलाइन का अवलोकन कराया जाए। मामला करीब तीन माह पहले उज्जैन के तराना में धर्मेंद्र नामक व्यक्ति की मौत के बाद उसकी हत्या के आरोप में आरोपी बनाए अर्जुन की जमानत का है। याचिका सुनवाई दौरान आरोपी की और से पैरवी एडवोकेट मनीष यादव ने की। उन्होने पैरवी दौरान कोर्ट को बताया कि पुलिस की केस डायरी के अनुसार धर्मेंद्र की मौत हाई वोल्टेज बिजली के करंट लगने से संभावित है परन्तु पुलिस ने संदेह के आधार पर अर्जुन को गिरफ्तार किया जबकि अर्जुन ने बताया कि वह और उसके साथी दिनेश, माखन और धर्मेंद्र बिजली लाइन के वितरण केंद्र से तेल चुराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान धर्मेंद्र को करंट लग गया और उसकी मौत हो गई। उन्होंने धर्मेंद्र को कालीसिंध नदी के पास खेत में छोड़ दिया और भाग गए। पुलिस ने अन्य के साथ धर्मेंद्र की हत्या में आरोपी अर्जुन के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। एडवोकेट मनीष यादव ने तर्क दिया कि उसे केवल संदेह के आधार पर झूठा फंसाया गया है। घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। जिस धर्मेंद्र नामक व्यक्ति की मौत हुई है, उसके साथ आखिरी बार अर्जुन को देखा गया था और इस आधार पर पुलिस ने उसे भी आरोपी बना लिया। जांच के दौरान कोई अन्य सामग्री जब्त नहीं की गई। एडवोकेट यादव ने कोर्ट को बताया कि इसी मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए व्यक्ति को जमानत मिल चुकी है। वहीं इस जमानत याचिका पर पुलिस ने कथित अपराध की गंभीरता के आधार पर आरोपी की जमानत का विरोध किया। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद जमानत खारिज करने वाले अपर सेशन जज को समानता के आधार पर जमानत दिए जाने को लेकर बनी गाइडलाइन का अवलोकन कराने के निर्देश दिए तथा याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *