Spread the love

इन्दौर। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा सुनाए गए निर्णयों के संदर्भ से डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने एक्सीडेंट क्लेम के एक मामले में सुनवाई करते बीमा कंपनी द्वारा 56.10 लाख क्लेम के परिवादी को देने के आदेश देते यह राशि बाद में चालक व मालिक से वसूलने को कहा। जबकि प्रकरण सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम अधिनियम में 2022 में सरकार द्वारा किए गए संशोधन का संदर्भ दिया। इसके तहत बीमा कंपनी क्लेम तभी दे पाएगी जब वाहन मालिक के पास लाइसेंस और फिटनेस प्रमाण पत्र हो, और उसके द्वारा बीमा पॉलिसी कराई गई हो। इनमें से कोई भी कमी रह जाती है तो कंपनी को क्लेम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। प्रस्तुत प्रकरण में ट्रक का फिटनेस प्रमाण पत्र और ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था। जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस संशोधन के बावजूद कंपनी को मुआवजा चुकाने के आदेश दिए। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि भोपाल-देवास हाईवे पर अशोक जो कि कोर्ट कर्मचारी था अपनी पत्नी बबीता के साथ बाइक से जा रहा था तभी ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी जिससे अशोक की मौके पर ही मौत हो गई। पत्नी ने अधिवक्ता राजेश खंडेलवाल के माध्यम से क्लेम के लिए परिवाद दायर किया था। इसमें कहा गया कि अशोक की कमाई से ही गृहस्थी चल रही थी। इस पर बीमा कंपनी ने एक्सीडेंट क्लेम के मामले में किए गए संशोधन का हवाला देते कोर्ट को बताया कि ट्रक के पास फिटनेस प्रमाण पत्र और ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था। नियमानुसार, कंपनी क्लेम देने को बाध्य नहीं है। परिवादी की ओर से दलील दी गई कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने फैसले दिए हैं। कंपनी पहले मुआवजा दे सकती है, बाद में जिम्मेदारों से वसूल सकती है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कंपनी को 56.10 लाख क्लेम देने के आदेश दिए। यह राशि बाद में चालक व मालिक से वसूलने का निर्णय सुनाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *