
निलंबनों और उपेक्षा के खिलाफ गरजे, चेताया: सात दिन में मांगें न मानीं तो करेंगे बस्ता बंद आंदोलन
गुना। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ वन विभाग प्रकोष्ठ के नेतृत्व में गुना वनमंडल के बीट गार्ड, परिक्षेत्र सहायक और अन्य कर्मचारी डीएफओ कार्यालय पहुंचे। उनका उद्देश्य विभागीय उपेक्षा, लगातार हो रहे निलंबनों और कार्य परिस्थितियों से जुड़ी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपना था। लेकिन कार्यालय पहुंचने पर कर्मचारियों को जानकारी मिली कि डीएफओ मौजूद ही नहीं हैं और न ही उन्होंने किसी अधिकारी को ज्ञापन लेने के लिए अधिकृत किया है। कर्मचारियों का कहना था कि यदि डीएफओ साहब उपलब्ध नहीं थे तो कम से कम किसी जिम्मेदार अधिकारी को ज्ञापन लेने भेजा जाना चाहिए था। मगर यहां तो उनकी कोई सुनवाई ही नहीं हुई। इससे नाराज कर्मचारियों ने इसे तानाशाही रवैया बताते हुए विरोध जताया। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अन्यायपूर्ण और मनमानी कार्यवाहियों का शिकार हो रहे हैं। वन विभाग की कार्यप्रणाली इस हद तक असंतुलित हो गई है कि अब छोटे-छोटे मामलों में भी सीधे निलंबन आदेश जारी कर दिए जाते हैं। ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने कई प्रमुख मांगें रखीं थीं। उनका कहना था कि यदि सात दिनों के भीतर इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे।
सबसे पहली मांग यह रखी गई कि किसी भी कर्मचारी को बिना जांच और बिना पक्ष सुने निलंबित करने की परंपरा तत्काल बंद की जाए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण का मुद्दा पूरे प्रदेश की समस्या है, लेकिन इसका पूरा ठीकरा केवल बीट गार्ड और परिक्षेत्र सहायक पर फोड़ दिया जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। जबकि शासन के निर्देश हैं कि अतिक्रमण हटाने का दायित्व सामूहिक होना चाहिए। इसके बावजूद हर बार नीचे स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जाता है। कर्मचारियों ने विशेष रूप से फतेहगढ़ परिक्षेत्र में पदस्थ परिक्षेत्र सहायक लाखन सिंह शिवहरे का मामला उठाया। उनका कहना था कि शिवहरे को कलोरा बीट का अतिरिक्त प्रभार केवल पांच महीने पहले ही सौंपा गया था। इसके बाद दो महीने लगातार बारिश के कारण किसी प्रकार की कार्रवाई संभव नहीं थी। बावजूद इसके उन्हें अतिक्रमण के नाम पर निलंबित कर दिया गया। कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण और अनैतिक बताते हुए शिवहरे का निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की।
संगठन ने कहा कि निलंबन की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। किसी भी कर्मचारी पर आरोप साबित होने से पहले कार्रवाई करना मनोबल तोडऩे का काम है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अब तक गुना वनमंडल में बीस से पच्चीस कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। लेकिन उन स्थलों पर जहां वास्तविक अतिक्रमण मौजूद था वहां से अतिक्रमणकारियों को हटाने की कोई ठोस पहल नहीं हुई। इस वजह से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और विभाग की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। एक अन्य बड़ी समस्या कर्मचारियों ने यह बताई कि जब भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है तो अतिक्रमणकारी सामूहिक रूप से कर्मचारियों पर हमला कर देते हैं। कई बार कर्मचारी घायल हो चुके हैं, लेकिन विभाग ने कभी उनकी सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया। कर्मचारियों ने मांग की कि आगे से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हो और कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण जैसे हेलमेट, चेस्ट गार्ड और अन्य सेफ्टी गियर उपलब्ध कराए जाएं। ताकि किसी अप्रिय स्थिति में उनकी जान जोखिम में न पड़े।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि विभागीय बैठकों में उनकी बात सुनी ही नहीं जाती। यदि कभी वे अपनी समस्याएं रखते भी हैं तो अधिकारियों का रवैया उपेक्षापूर्ण होता है। उन्होंने मांग की कि हर माह एक बार कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच संवाद बैठक हो, जिसमें समस्याओं पर खुले तौर पर चर्चा की जाए और समाधान निकाला जाए। ज्ञापन में वन अपराधों की जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। कर्मचारियों ने कहा कि जब भी कोई वन अपराध दर्ज होता है तो बिना पूरी जांच किए मैदानी कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी जाती है। जबकि अपराधियों को पकडऩे और उनके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही में ढिलाई बरती जाती है। संगठन ने मांग की कि वन अपराधों की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और दोषी साबित होने पर ही कर्मचारी पर कार्रवाई की जाए। अंत में संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सात दिनों के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे बस्ता बंद आंदोलन शुरू करेंगे। इसके बाद आवश्यकता पडऩे पर हड़ताल भी की जाएगी। जिला अध्यक्ष चेतन वाजपेयी और जिला सचिव कृष्ण रघुवंशी ने कहा कि लगातार हो रहे अन्यायपूर्ण निलंबन और उपेक्षापूर्ण रवैये से कर्मचारी आक्रोशित हैं। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो इसका असर सीधे विभागीय कार्यप्रणाली और वन संरक्षण पर पड़ेगा।
