
मलाजखंड एरिया कमेटी के सदस्यों ने दिया वारदात को अंजाम
पर्चों को पुलिस ने किया बरामद …………. लांजी क्षेत्र के चौरिया गांव की घटना
बालाघाट। पुलिस मुखबिरी के शक पर नक्सलियों ने एक युवक का पहले अपहरण कर लिया। बाद में उसकी हत्या कर दी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक शव को बरामद नहीं किया है। नक्सलियों ने लाल स्याही से लिखे दो पर्चे भी छोड़े हैं, पर्चे में मुखबिरी करने के कारण उसे मौत के घाट उतारने का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने दोनों पर्चों को बरामद कर लिया है। घटना के बाद से जंगलों में सर्चिंग तेज कर दी है। 800 से अधिक जवानों ने मोर्चा संभाला हुआ है। मामला लांजी क्षेत्र के चौरिया गांव का है।
जानकारी के अनुसार पौसेरा निवासी देवेंद्र यादव 24 वर्ष अपने साथी अवधेश के साथ जंगल में दहियान का संचालन करता है। यह दहियान चौरिया और राहली गांव के बीच में संचालित है। इसी दहियान के माध्यम से वह दूध, दही बेचकर अपनी आजीविका चलाता था। मंगलवार की शाम को नक्सलियों ने मुखबिरी के शक में देवेंद्र का अपहरण कर लिया। बताया गया है कि बुधवार को देवेंद्र का शव मिला है, लेकिन पुलिस की ओर से इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल पुलिस इसे अपहृत मानकर ही मामले की जांच कर रही है। इस पूरे घटना की जिम्मेदारी मलाजखंड एरिया कमेटी भाकपा (माओवादी) ने ली है।
पुलिस मुखबिरी की सजा देने का उल्लेख
घटना के बाद नक्सलियों ने मौके पर लाल स्याही से लिखे दो पर्चें फेंके हैं। पुलिस ने दोनों ही पर्चों को जब्त कर लिया है। इस पर्चे में उल्लेख किया गया है कि देवेंद्र पुलिस का मुखबिर था। उसने माओवादी पार्टी की 3-4 बार सूचना पुलिस को दी थी। इतना ही नहीं वह डेराओं की पतासाजी भी करता था। इसको पुलिस ने जंगल पर दहियान के नाम से बैठाया था। देवेंद्र पित्तकोना पुलिस को दही, दूध देने का कार्य भी करता था। इसकी जांच करने के बाद ही उसे मौत की सजा दी गई है। नक्सलियों ने ग्रामीणों को पुलिस मुखबिर न बनने की चेतावनी दी है। उन्होंने पत्र में कहा है कि ऐसे मुखबिरों को अपने-अपने गांव में सुधारा जाए।
पुलिस ने किया स्पष्ट, देवेंद्र नहीं था मुखबिर
नक्सलियों के पर्चे मिलने के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि देवेंद्र पुलिस का मुखबिर नहीं था। बल्कि वह सामान्य ग्रामीण था और अन्य ग्रामीणों के जैसा ही अपना जीवन-यापन करता था। दहियान के माध्यम से वह दूध, दही बेचने का कार्य करता था। पुलिस के साथ-साथ ग्रामीण भी उसके दहियान से दूध, दही लेने का कार्य करते थे।
30 पार्टियों ने जंगल में संभाला मोर्चा
इस घटना के बाद से जंगलों में सर्चिंग तेज कर दी गई है। 30 पार्टियों में शामिल 800 से अधिक जवानों ने जंगल में मोर्चा संभाले हुए है। बुधवार की देर शाम तक पुलिस जंगलों में सर्चिंग करते रही। पुलिस की माने तो उन्हें देवेंद्र का शव नहीं मिल पाया था। सुरक्षा में लगे जवान नक्सलियों के उन सभी संदिग्ध और चिन्हित स्थानों को टारगेट कर रहे हैं, जहां से नक्सलियों का आवागमन होने की संभावना बनी रहती है। इधर, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी इस ऑपरेशन को लेकर कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं।
माता-पिता का था इकलौता पुत्र
पुलिस के अनुसार देवेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। उसके माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। उसकी तीन बहनें हैं, जिसमें से दो का विवाह हो चुका है। एक छोटी बहन गांव में रहती है।
इनका कहना है
अपहृत युवक देवेंद्र पुलिस का मुखबिर नहीं था। वह सामान्य ग्रामीण था। पौसेरा निवासी देवेंद्र यादव अपने साथी अवधेश के साथ चौरिया और राहली के बीच दहियान में रहते थे। मंगलवार को देवेंद्र का अपहरण हो गया। अवधेश ने भी पूछताछ में इसकी पुष्टि की है। लाल स्याही से लिखे दो पर्चों को पुलिस ने जब्त कर लिया है, जिसकी जांच की जा रही है। पर्चों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की मलाजखंड एरिया कमेटी ने युवक का अपहरण करने की जिम्मेदारी ली है।
-संजय सिंह, आईजी बालाघाट जोन
