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तिरुवंतनपुरम। केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग से राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की योजना को टालने को कहा है, क्योंकि यहां स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं। सूत्रों ने बताया, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी, जो एसआईआर शुरू करने की तैयारी को लेकर थी। बैठक में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने निकाय चुनाव को ध्यान में रखकर एसआईआर को स्थगित करने की मांग की। इसलिए, केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग से राज्य में एसआईआर को टालने की मांग रखी।
केरल राज्य में राजनीतिक दल स्थानीय निकायों के लिए चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, जिनका 5 साल का कार्यकाल दिसंबर 2025 में समाप्त हो रहा है। राज्य में अगला विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई 2026 में होने वाला है। निर्वाचन आयोग ने पूरे भारत में एसआईआर के रोलआउट की समय-सीमा की घोषणा नहीं की है, लेकिन केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तैयारियों के तहत कई कदम उठाए हैं। सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई है। इसके अलावा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तैयार रहें, एसआईआर आ रहा है नाम से अभियान भी शुरू किया था। केरल में इसके पहले 2002 में एसआईआर कराया गया था। सत्तारूढ़ वाम मोर्चा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने नए एसआईआर का विरोध किया है। केवल भारतीय जनता पार्टी ने इस प्रक्रिया के खिलाफ नहीं है।
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एम.लिजु और कांग्रेस विधायक पीसी विष्णुनाध सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए थे। लिजु ने कहा, अगर 2002 की मतदाता सूची को आधार माना जाता है, तब करीब 50 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा है। यह प्रति विधानसभा क्षेत्र में करीब 20 हजार मतदाताओं के बराबर होगा। इसलिए कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले इस प्रक्रिया को आयोजित करना अव्यवहारिक है।

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