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वकील पर भड़क उठे जस्टिस सूर्यकांत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और नवंबर में भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने मंगलवार को एक वकील की तगड़ी फटकार लगा दी। उन्होंने कहा कि वे किसी मामले को उसी दिन तत्काल सुनवाई के लिए तब तक सूचीबद्ध नहीं करूंगा, जब तक कि किसी की फांसी न होने वाली हो। उन्होंने पूछा कि क्या कोई जजों की व्यथा, उनके काम के घंटों और उनकी नींद की कमी को समझता है।
दरअसल सुबह की मेंशनिंग सेशन के दौरान वकील ने अपने याचिकाकर्ता के मकान की उसी दिन नीलामी होने का हवाला देकर पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, जब तक किसी को फांसी न होने वाली हो, मैं कभी भी किसी मामले को उसी दिन सूचीबद्ध नहीं करूंगा।
जस्टिस सूर्याकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह भी शामिल थे। आमतौर पर, रोस्टर के मास्टर के रूप में, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर.गवई इस तरह के उल्लेखों की सुनवाई करते हैं। हालांकि, वह वर्तमान में पांच जजों की संविधान पीठ में व्यस्त हैं। ऐसी स्थिति में, प्रथा के अनुसार, दूसरी सबसे वरिष्ठ जज तत्काल मामलों की सुनवाई करते हैं।
दरअसल जस्टिस कांत की टिप्पणी तब आई, जब वकील शोभा गुप्ता ने राजस्थान में एक आवासीय मकान की नीलामी से जुड़े एक मामले को तभी सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। वकील गुप्ता ने कहा कि मकान की नीलामी आज होनी है, इसलिए मामले को तत्काल सुनवाई के लिए रखा जाए। जब गुप्ता ने बार-बार अनुरोध किया, तब जस्टिस कांत ने पूछा कि नीलामी का नोटिस कब जारी हुआ था। गुप्ता ने बताया कि नोटिस पिछले हफ्ते जारी हुआ था। इस पर जस्टिस कांत ने गुप्ता को सख्त लहजे में कहा कि अगले कुछ महीनों तक मामले की सुनवाई की उम्मीद न करें। हालांकि, बाद में उन्होंने कोर्ट मास्टर को निर्देश दिया कि इस मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करे।
सुप्रीम कोर्ट में हर दिन नियमित सुनवाई शुरू होने से पहले वकीलों को अधिकार होता है कि वे जरूरी मामलों का जिक्र (मेंशनिंग) कर तुरंत सूची की मांग करें। अक्सर इसतरह के मामलों में वकील कहते हैं कि यदि अदालत ने तुरंत दखल नहीं दिया, तब उनके मुवक्किल को गंभीर नुकसान हो सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में कई बार न्यायालय ने नाराजगी जाहिर की है।
जस्टिस सूर्यकांत पर सबकी नजर
नवंबर 2025 में मौजूदा सीजेआई गवई का कार्यकाल पूरा होने पर जस्टिस सूर्यकांत भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालने वाले है। इसके बाद उनकी हालिया टिप्पणी को न्यायपालिका की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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