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13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई; सरकारी जमीन पर काबिज लोगों को मिल सकती है राहत
भोपाल । यौन शोषण और ड्रग्स तस्करी के मामले में फंसे भोपाल के मछली परिवार प्रकरण में 13 अक्टूबर को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले जिला प्रशासन हाईकोर्ट में दस्तावेज पेश करेगा। ये दस्तावेज नियम-कायदों से जुड़े हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, भोपाल कलेक्टर, डीसीपी क्राइम और तीनों बैंकों के अधिकारियों को रिकॉर्ड के साथ प्रस्तुत होने और कार्रवाई की वैधता स्पष्ट करने को कहा था।
पिछले सप्ताह मामले पर सुनवाई हो चुकी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में जबाव पेश करते हुए बताया गया था कि कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की गई है। जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जबाव मांगते हुए फैसला सुरक्षित रखा है। बता दें कि मछली परिवार की साजिदा बी के साथ 9 अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया था कि सरकार ने कार्रवाई के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। जिसे लेकर यह याचिका दायर की गई।
सभी दस्तावेज तैयार…….
स्थानीय अफसरों का कहना है कि कार्रवाई नियमों के अनुसार ही की गई थी। हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा है। दस्तावेज भी तैयार है। जल्द ही हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। बता दें कि भोपाल के आनंदपुरा में रहने वाली साजिदा बी एवं अन्य 7 लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया गया कि उनके नाम एफआईआर में नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई अपराध की जांच चल रही है। इसके बावजूद भी यासीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज होते ही उनकी संपत्ति तोड़ी गई। बैंक खाता भी फ्रीज किए गए। यहां तक कि उनके ई-मेल भी ब्लॉक कर दिए गए।
अभियुक्त नहीं फिर भी मकान तोड़ा……..
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया था कि किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त नहीं हैं। फिर भी उनके मकानों को तोड़ा गया। 21 अगस्त-25 को जब प्रशासन ने संपत्ति ध्वस्त करने को लेकर कार्रवाई की थी तो कोई भी वैद्य नोटिस या उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अन्य सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन केवल उन्हें ही निशाना बनाया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना अभियोग के घरों को तोडऩा, बैंक खाता फ्रीज करना और हथियार लाइसेंस निलंबित करना संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

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