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खाली दवाई स्ट्रीप देने के मामले में छः साल बाद आया फैसला
इन्दौर। जिला उपभोक्ता प्रतितोष फोरम इंदौर ने मेडिकल स्टोर संचालक और दवा कंपनी को 169 रुपए ग्राहक को लौटाने के साथ ग्राहक को हुई शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना हेतु हर्जाना तथा कोर्ट खर्च के बतौर 10 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। राशि 45 दिन में नहीं चुकाने पर 18% ब्याज भी देना होगा। मामला छह साल पुराना होकर ग्राहक को दवाई की खाली स्ट्रिप देने का था। छः साल पहले पंकज शर्मा निवासी पीपल्याहाना तबीयत खराब होने पर 2 दिसंबर 2019 को डॉ. प्रफुल्ल दुबे का पर्चा लेकर कंचन बाग स्थित देशाना मेडिकल स्टोर पर गए थे। वहां से उन्होंने दुकानदार से 10 टैबलेट की स्ट्रिप (बेच नंबर 27802, एक्सपायरी अक्टूबर 2021) 169 रुपए में खरीदी। घर पर टैबलेट की स्ट्रिप को बॉक्स से निकाला तो देखा कि स्ट्रिप में एक भी टैबलेट नहीं है, जबकि स्ट्रिप सील है। उन्होंने इसकी शिकायत दवाई निर्माता कंपनी मेटिओ हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड (अहमदाबाद) को ई-मेल से की, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने 9 जनवरी 2020 को देशना मेडिकल स्टोर और मेटिओ हेल्थ केयर प्रालि (अहमदाबाद) के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम की शरण ली। इसमें उन्होंने टैबलेट की राशि 169 रुपए, शारीरिक व मानसिक रूप से हुई प्रताड़ना के लिए 2 लाख रुपए और कोर्ट खर्च के 25 हजार रुपए दिलाने की मांग की। उन्होंने फोरम में खुद का शपथ पत्र पेश किया। साथ ही डॉक्टर की स्लिप, दवाई का बिल, दवाई की खाली स्ट्रिप के फोटोग्राफ्स, ई-मेल आदि पेश किए। नोटिस मिलने के बाद भी मेटिओ हेल्थ केयर प्रालि (अहमदाबाद) की ओर से फोरम के समक्ष कोई उपस्थित नहीं हुआ। इस पर 14 फरवरी 2022 को कंपनी के खिलाफ एक पक्षीय कार्यवाही की गई। वहीं देशना मेडिकल स्टोर के संचालक ने फोरम में तर्क दिया कि उनकी मेडिकल की दुकान है। वे विभिन्न कंपनियों की दवाइयां बेचते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि पंकज शर्मा ने उनके मेडिकल से दवा ली है। दवाई की जांच करने के बाद उन्हें 212 रुपए का भुगतान किया है। उनका कहना था शर्मा द्वारा उन्हें घटना की कोई सूचना नहीं दी गई इसलिए उनके खिलाफ परिवाद निरस्त किया जाए इसके बाद स्टोर संचालक भी कई पेशियों और अंतिम तर्क के समय भी अनुपस्थित रहे। फोरम ने देशना मेडिकल स्टोर और मेटिओ हेल्थ केयर प्रालि (अहमदाबाद) की सेवा में कमी पाते आदेश दिया कि दोनों फरियादी पंकज शर्मा को दवाई की कीमत 169 रुपए 45 दिनों में अदा करें। इसके अलावा फरियादी को हुई मानसिक और शारीरिक तकलीफ के लिए 5 हजार रुपए और परिवाद का 5 हजार रुपए का खर्च भी अदा करें। यदि 45 दिनों में यह राशि अदा नहीं करते हैं तो 18% वार्षिक साधारण ब्याज दर के साथ राशि अदा करनी होगी।

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