
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई का कहना है, कि भारतीय न्याय व्यवस्था रूल ऑफ लॉ यानी कानून के शासन से चलती है, इसमें बुलडोजर एक्शन की जगह नहीं है। सीजेआई मॉरीशस में आयोजित सर मॉरिस रॉल्ट मेमोरियल लेक्चर 2025 में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल के फैसले में स्पष्ट किया था कि किसी आरोपी के खिलाफ बुलडोजर चलाना कानून की प्रक्रिया को तोड़ना है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई ने कहा कि सरकार एक साथ जज, जूरी और जल्लाद नहीं बन सकती। बुलडोजर शासन संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। लेक्चर के दौरान मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल, पीएम नवीनचंद्र रामगुलाम और मुख्य न्यायाधीश रेहाना मंगली गुलबुल भी मौजूद थे। सीजेआई गवई ने तीन तलाक खत्म करने, व्यभिचार कानून को निरस्त करने, चुनावी बॉन्ड स्कीम और निजता को मौलिक अधिकार मानने जैसे फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी फैसलों ने दिखाया कि कोर्ट ने रूल ऑफ लॉ को एक ठोस सिद्धांत बनाया है, जिससे मनमाने और अन्यायपूर्ण कानून खत्म किए गए।
चीफ जस्टिस गवई ने कहा कि भारत में रूल ऑफ लॉ केवल नियमों का सेट नहीं है, बल्कि यह नैतिक और सामाजिक ढांचा है, जो समानता, गरिमा और सुशासन तय करता है। उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान का हवाला देते हुए कहा कि उनका दृष्टिकोण बताता है कि लोकतंत्र में कानून का राज ही समाज को न्याय और जवाबदेही की ओर ले जाता है।
