
इन्दौर । मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस जयकुमार पिल्लई की युगलपीठ ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते माना कि यदि हत्या की नीयत के बगैर किसी पर हुए हमले में उसे गंभीर चोटें आएं तो उसे हत्या का प्रयास नहीं माना जा सकता। ट्रायल कोर्ट ने मारपीट के एक मामले में हत्या के प्रयास की धाराओं को हटाते निर्णय सुनाया था जिसके खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा शामिल करने की मांग करते पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील याचिका दायर की थी। याचिका कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि उज्जैन निवासी हिमांशु सारवान और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वर्ष 2018 में पड़ोसियों अमित सारवान और सुमित सारवान ने उन पर और उनके पिता पर लकड़ी से हमला किया था, जिसमें उन्हें चोटें आई थीं। उनकी बहन के साथ भी मारपीट की गई थी। पुलिस ने हत्या के प्रयास की धाराओं को जोड़ते हुए प्रकरण चालान ट्रायल कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने उन्हें मारपीट और अन्य धाराओं में सजा सुनाई, लेकिन हत्या के प्रयास की धारा खारिज कर दी थी। ट्रायल कोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका सुनवाई उपरांत हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते कहा कि दोनों पक्षों में पहले से दुश्मनी नहीं थी। मामूली विवाद में अचानक हुए हमले में किसी कठोर वस्तु से वार करने के पीछे हत्या का इरादा नहीं हो सकता। लट्ठ या लाठी घातक हथियार नहीं है। हत्या के इरादे के बगैर यदि कोई किसी के अंगों को नुकसान पहुंचाता है तो हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनता है। अतः ट्रायल कोर्ट का निर्णय बरकरार रखा जाता है।
