
नक्सलियों का बढ़ रहा मूवमेंट, किन्ही चौकी क्षेत्र के जंगल में हॉकफोर्स के जवानों से हुआ आमना-सामना
दैनिक उपयोग की सामग्री लेने के लिए गांव आ रहे थे नक्सली
बालाघाट। जिले में फिर से नक्सलियों का मूवमेंट बढऩे लगा है। किरनापुर थाना क्षेत्र के किन्हीं चौकी के जंगल में हॉकफोर्स के जवानों और नक्सलियों के बीच आमना-सामना हो गया। इस दौरान दोनों ओर से एक्सचेंज ऑफ फायर हुआ। घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है। नक्सली घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए। हालांकि, नक्सलियों के घायल होने की संभावना के चलते जंगलों में सर्च अभियान जारी रखा है।
जानकारी के अनुसार किरनापुर थाने के किन्ही पुलिस चौकी के वन ग्राम कलकत्ता, आलीटोला और बोदालझोला जंगल क्षेत्र में 3 अक्टूबर की देर रात्रि से 4 अक्टूबर की सुबह तक स्पेशल हॉकफोर्स व नक्सलियों के बीच एक्सचेंज ऑफ फायरिंग होते रही। घटना के बाद से नक्सल उन्मूलन में लगे जवानों ने सर्चिंग तेज कर दी है। संभावना जताई जा रही है कि फायरिंग में नक्सली घायल हुए होंगे। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक न तो घायलों की जानकारी मिल पाई थी और न ही अधिकारिक रुप से इसकी पुष्टि हो पाई है। हालांकि, पुलिस और सुरक्षाबलों की सतर्कता के चलते स्थिति नियंत्रण में है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा क्षेत्र में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और नक्सल नेटवर्क पर शिकंजा कसने की कोशिशें जारी हैं।
उल्लेखनीय है कि नक्सली इन दिनों अपने संगठन की 20 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। हर साल 21 सितंबर से 20 अक्टूबर तक नक्सली इस वर्षगांठ पर जगह-जगह बैनर-पोस्टर टांगकर सरकार और पुलिस के खिलाफ ग्रामीणों को गुमराह करने का प्रयास करते हैं।
रसद सामग्री लेने कलकत्ता गांव की ओर आ रहे थे नक्सली
जानकारी के अनुसार नक्सली दैनिक उपभोग की सामग्री लेने के लिए जंगल के रास्ते कलकत्ता गांव की ओर आ रहे थे। नक्सल उन्मूलन में लगे जवानों को भी नक्सलियों के आने की सूचना मिली थी। जिसके आधार पर जवान जंगलों में सर्चिंग कर रहे थे। इसी दौरान नक्सलियों से जवानों का आमना-सामना हो गया। दोनों ओर से फायरिंग हुई। नक्सली अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए। बताया गया है कि घटना के दौरान करीब आधा दर्जन नक्सली मौजूद थे। नक्सलियों और जवानों के बीच कितने राउंड फायर हुए, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। गौरतलब है कि 17 सितंबर की देर रात मलाजखंड दलम के नक्सलियों ने दक्षिण बैहर के चौरिया निवासी देवेंद्र यादव को अगवा कर लिया था। मौके पर कुछ पर्चे भी छोड़े थे। पर्चे में देवेंद्र को पुलिस का मुखबिर बताकर उसे मौत की सजा देने का उल्लेख किया था। दूसरे दिन 18 सिंतबर को जंगल में देवेंद्र का शव मिला था। नक्सलियों ने उसकी हत्या कर दी थी। इसी दिन माओवादियों ने परसवाड़ा के चीनी कुकड़ा मार्ग पर बैनर और पोस्टर टांगकर विशेष सहयोगी दस्ता भर्ती व सरकार की योजनाओं का विरोध जताया था। इस घटना के बाद से जवानों ने जंगल में सर्च अभियान चलाया।
कलकत्ता गांव में ली घर-घर की तलाशी
एक्सचेंज ऑफ फायर होने के बाद हॉकफोर्स, जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ के जवानों ने कलकत्ता गांव पहुंचकर प्रत्येक घरों की तलाशी ली। दरअसल, यह सर्चिंग नक्सलियों के छिपे होने की संभावना के चलते ली गई थी। लेकिन गांव में नक्सली नहीं मिले। बावजूद इसके जवान अलर्ट हैं और नक्सल मूवमेंट से जुड़ी प्रत्येक गतिविधियों पर निगाहें रख रहे हैं। जंगल क्षेत्र में नक्सलियों की तलाशी के लिए सर्चिंग जारी रखी है।
सुरक्षा में लगे जवान अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी
इस घटना के बाद से जिले में नक्सल उन्मूलन में लगे जवानों को अलर्ट कर दिया गया है। जंगल क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। खासतौर पर उन क्षेत्रों फर ज्यादा फोकस किया जा रहा है, जहां से नक्सलियों के आने-जाने की संभावना अधिक होती है। इतना ही नहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सर्चिंग तेज कर दी गई है। ताकि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम न दे सकें। उल्लेखनीय है कि मिशन 2026 के तहत जिले से नक्सलियों का खात्मा करने के लिए जवानों ने कमर कसी हुई है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। हार्डकोर नक्सलियों के मुठभेड़ में मारे जाने से दलम कमजोर होने लगा है। नक्सलियों की संख्या भी कम हो रही है, लेकिन उनकी मौजूदगी बनी हुई है।
