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एक्सचेंज ऑफ फायर में नक्सलियों के घायल होने की संभावना
3 अक्टूबर की रात्रि में कलकत्ता-बटामा के जंगल में नक्सलियों से हुआ था आमना-सामना

बालाघाट। नक्सलियों के मंसूबों को विफल करने के लिए जवानों ने जंगल में मोर्चा संभाल लिया है। 19 टीमें सर्च ऑपरेशन चला रही है। एक्सचेंज ऑफ फायर में नक्सलियों के घायल होने की संभावना के चलते सर्चिंग अभियान जारी है। हॉकफोर्स, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के जवान जंगलों में लगातार सर्चिंग कर रहे हैं। दरअसल, 3 अक्टूबर की रात्रि में किरनापुर थाना क्षेत्र के कलकत्ता-बटामा वन क्षेत्र में जवानों का नक्सलियों से आमना-सामना हो गया था। दोनों ओर से एक्सचेंज ऑफ फायर हुआ। इस मुठभेड़ में नक्सलियों के घायल होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार नक्सल विरोधी अभियान के तहत किरनापुर थाना क्षेत्र के जंगलों में सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा था। 3 अक्टूबर की रात्रि कलकत्ता-बटामा वनक्षेत्र में 8-10 सशस्त्र नक्सलियों से जवानों का आमना-सामना हो गया था। हॉकफोर्स और जिला पुलिस बल के जवानों ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी। लेकिन नक्सलियों ने जवानों को जान से मारने की नियत से फायरिंग कर दी। जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की। नक्सली अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए। इस मुठभेड़ के बाद से ही जंगलों में सीआरपीएफ, हॉकफोर्स और कोबरा बटालियन के जवान सर्चिंग अभियान चला रहे हैं। इधर, नक्सली हलचल के चलते जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों पर अलर्ट कर दिया गया है। जंगलों में सर्चिंग बढ़ा दी गई है। खासतौर छग और महाराष्ट्र राज्य की सीमा से लगे जंगलों में पुलिस द्वारा विशेष निगरानी रखी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में नक्सलियों की सक्रियता ज्यादातर कान्हा नेशनल पार्क के अलावा जिले के रुपझर, बैहर, मलाजखंड, बिरसा, लांजी, किरनापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जंगलों में ज्यादा है। इन क्षेत्रों में टांडा-मलाजखंड दलम, दर्रेकसा दलम, प्लाटून-2, प्लाटून-3, विस्तार दलम, खटियामोचा दलम के नक्सली सक्रिय है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में भी जारी है ऑपरेशन
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार ज्वाईंट ऑपरेशन चलाया जा रहा है। तीनों ही राज्यों में नक्सल उन्मूलन में लगे जवान आपसी समन्वय स्थापित कर ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं। इस ऑपरेशन के दौरान जंगल के रास्तों पर विशेष निगाहें रखी जा रही है। ताकि नक्सली घने जंगलों का फायदा उठाकर फरार न हो जाए। दरअसल, बालाघाट जिले में छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव, कवर्धा कबीर धाम और महाराष्ट्र राज्य के गोंदिया जिले की सीमा लगी हुई है। ये तीनों राज्य जंगल के रास्ते आपस में जुड़े हुए है। जिसके चलते घने जंगलों का फायदा उठाकर नक्सली एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवेश कर जाते हैं।
नक्सली धीरे-धीरे बढ़ा रहे सक्रियता
जिले में हार्डकोर नक्सलियों के मारे जाने के बाद जहां उनकी पकड़ ढीली हो रही थी। वहीं अब एक बार फिर से नक्सली धीरे-धीरे अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। हाल ही में चौरिया गांव के एक युवक का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी। परसवाड़ा, लांजी क्षेत्र में बैनर, पोस्टर लगाकर अपनी मौजूदगी का एहसास करा रहे हैं। कान्हा नेशनल पार्क, दक्षिण बैहर क्षेत्र और मप्र, छग व महाराष्ट्र राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सलियों की सक्रियता ज्यादा नजर आ रही है। हालांकि, जवानों की लगातार सर्चिंग और सतर्कता के चलते नक्सली अपने मंसूबों पर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। जवानों ने नक्सलियों के आवागमन के रास्तों पर पहरा बढ़ा दिया है। इसी कारण नक्सली आसानी से किसी वारदात को अंजाम नहीं दे पा रहे। एक दर्जन से अधिक नक्सलियों का मूवमेंट बना हुआ है। ये नक्सली मलाजखंड दलम, विस्तार दलम, दर्रेकसा दलम, टांडा दलम के बताए जा रहे हैं।

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