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कलेक्टर ने कराई जांच, एफआइआर दर्ज ……..मामले का खुलासा होते ही फरार हुआ लिपिक
जांच में जुटी कोतवाली थाना पुलिस

बालाघाट। कोतवाली थाना बालाघाट के मालखाना से 55 लाख रुपए की चोरी का मामला अभी थमा भी नहीं है और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट बालाघाट का भ्रष्टाचार सामने आ गया। डाइट में पदस्थ लिपिक गजेंद्र सिंह बैस द्वारा 10 लाख 53 हजार 387 रुपए की आर्थिक अनियमितता की गई है। अमानत में खयानत की जानकारी लगते ही कलेक्टर मृणाल मीना ने इस मामले की सहायक कलेक्टर और जिला कोषालय अधिकारी से जांच कराई। जांच के बाद लिपिक गजेंद्र सिंह बैस के खिलाफ शिकायत के आधार पर कोतवाली पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर मामले को जांच में लिया है।
जानकारी के अनुसार शिकायत में बताया गया कि डीएड के द्वि वार्षिक पाठ्यक्रम के प्रथम व द्वितीय वर्ष के बच्चों से एक वर्ष की शुल्क 9 हजार रुपए जमा कराई जाती है। इस राशि को संस्थान विकास निधि कहा जाता है। इस समिति के अध्यक्ष कलेक्टर और सचिव संस्थान प्राचार्य होते है। इस निधि में जमा राशि को संस्था में आवश्यकतानुसार खर्च किया जाता है। इसी राशि में से संस्थान के लिपिक गजेंद्र सिंह द्वारा 10 लाख 53 हजार 387 रुपए की अफरा-तफरी कर दी है। बताया गया है कि इस राशि को संस्थान विकास निधि के खाते में जमा करने की बजाए लिपिक ने अपने स्वयं के खाते में जमा करा दिया। शासकीय राशि में गबन का कार्य लिपिक द्वारा पिछले 6 वर्षों से किया जा रहा था।
दो सदस्यीय टीम ने की जांच
शासकीय राशि के अफरा-तफरी होने की जानकारी मिलते ही कलेक्टर मृणाल मीना ने दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। जिसमें सहायक कलेक्टर आकाश अग्रवाल और जिला कोषालय अधिकारी शामिल है। इन दोनों ही अधिकारियों ने बीते दिनों डाइट पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान 1053387 रुपए की आर्थिक अनियमितता पाई गई। प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने इस मामले की प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश संस्थान के प्राचार्य को दिए। प्राचार्य नरेश प्रसाद मलगाम ने 18 अक्टूबर को मामले की एफआइआर कोतवाली में दर्ज कराई। कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर लिपिक गजेंद्र सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर प्रकरण को जांच में लिया है।
वर्ष 2010 से पदस्थ है लिपिक
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सहायक ग्रेड-3 गजेंद्र सिंह बैस वर्ष 2010 से डाइट बालाघाट में पदस्थ है। लिपिक ने अगस्त 2019 से लेकर 31 जुलाई 2025 के बीच प्रशिक्षणार्थियों से प्राप्त राशि में से 10 लाख 53 हजार 387 रुपए को अपने खाते में जमा कराया है। बताया गया है कि लिपिक ने यूपीआई के माध्यम से इस राशि को अपने बैंक खाते में जमा कराया था।
अध्यक्ष और सचिव के अनुमोदन से खर्च की जाती है राशि-प्राचार्य
डाइट प्राचार्य नरेश प्रसाद मलगाम ने बताया कि डीएड में प्रवेश लेने वाले बच्चों से प्राप्त शुल्क को संस्थान विकास निधि (स्थानीय निधि) के रुप में जमा कराया जाता है। यह शुल्क प्रत्येक विद्यार्थी से 9 हजार रुपए लिए जाते हैं। इस राशि को संस्था में विभिन्न क्रियाकलाप व आवश्यकतानुसार खर्च किया जाता है। जिसके लिए संस्था के अध्यक्ष व सचिव के अनुमोदन होना अनिवाार्य होता है। जमा राशि से कार्य के एवज में संस्था के लिपिक गजेन्द्र सिंह द्वारा संबंधित फर्म के खाते में राशि न डालकर अपने स्वयं के खाते में राशि जमा करवाकर नियम विरूद्ध कार्य कर वित्तीय अनियमितता की गई है। यह मामला कलेक्टर के संज्ञान में आने पर उन्होंने सहायक कलेक्टर व कोषालय अधिकारी से जांच करवाई थी। जांच में 10 लाख 53,387 रूपये की राशि का वित्तीय अनियमितता करना पाया गया। जिसका जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर कलेक्टर के समक्ष नोट सीट पेश किया गया। संबंधित लिपिक गजेन्द सिंह बैस के खिलाफ कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज कराई गई।

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