हर गर्भवती महिला को जोखिम वाली मानते हुए गर्भावस्था दौरान गुणात्मक स्वास्थ्य जांच एवं देखभाल की जाये

दमोह। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर मातृ–शिशु स्वास्थ्य के तहत दी जा रही सेवाओं में गुणात्मक सुधार एवं कसावट लाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के विकासखंड एवं मैदानी स्तर पर कार्यरत सेवा प्रदाताओं की उपस्थिति में निरंतर रूप से बैठक ली जा रही है। इस क्रम में आज विकासखंड पथरिया के शासकीय माधवराव सप्रे महाविद्यालय के सभागार में स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की एक महत्वपूर्ण समन्वित बैठक ली गई। श्री कोचर ने आयोजित बैठक में चलाये जा रहे विशेष टीकाकरण अभियान एवं माह नवंबर में शून्य मातृ–मृत्यु हेतु बनाई गई रणनीति पर कार्यकर्ताओं से दो तरफा संवाद किया गया। उन्होने कहा कि हर गर्भवती महिला को जोखिम वाली मानते हुए गर्भावस्था दौरान गुणात्मक स्वास्थ्य जांच एवं देखभाल की जाये। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के.अठया, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रीता चटर्जी, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चौहान और मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. जतिन दुबे विशेष रूप से मौजूद रहे।
शहरी पथरिया क्षेत्र में आंगनवाडी कार्यकर्ता टीकाकरण सत्र पर बच्चों को लाने का कार्य करेंगी

बैठक दौरान कलेक्टर श्री कोचर ने सीडीपीओ को निर्देश दिये कि शहरी पथरिया क्षेत्र में आयोजित विशेष टीकाकरण सत्र पर तैयार की गई ड्यू लिस्ट अनुसार आंगनवाडी कार्यकर्ता बच्चों को लाना सुनिश्चित करेंगी। स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग का अमला समन्वित रूप से एक टीम के रूप में ड्यू लिस्ट अनुसार सभी बच्चों को टीकाकृत कराने का काम करेंगी।समुदाय स्तर पर हर बुधवार को आशा कार्यकर्ता न होने की स्थिति में आंगनवाडी सहायिका एवं कार्यकर्ता नई गर्भवती महिलों की खोज करेंगी। अगले ही दिन गुरूवार को क्षेत्र अंतर्गत नजदीकी स्वास्थ्य संस्था में मानक अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं प्रदाय करायेंगी। साथ ही माह नवंबर में जीरो मातृ–मृत्यु के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु स्वास्थ्य अमला के साथ समर्पण एवं सेवाभाव के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगी।
जीरो मातृ–मृत्यु के लिए 1, 2, 3 एवं 7, 8, 9 रणनीति पर विशेष बल
बैठक दौरान कलेक्टर श्री कोचर ने माह नवंबर में किसी भी गर्भवती महिला की मृत्यु न हो तथा हर प्रसव सुरक्षित रूप से संस्थागत स्तर पर हो, यह सुनिश्चित करने के लिए 1, 2, 3 एवं 7, 8, 9 रणनीति पर विशेष बल दिया। इसके लिए एक टीम के रूप में स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग हर स्तर पर सतर्कता और तत्परता एवं समन्वय के माध्यम से एक टीम के रूप में कार्य करने जोर दिया।
1, 2, 3 रणनीति के तहत गर्भावस्था के पहले तीन माह में गर्भवती का पंजीयन कर गर्भावस्था की देखभाल से जुड़ी सभी स्वास्थ्य सेवाएं दी जायें। गर्भावस्था की अंतिम तिमाही अर्थात 7वें से 9वें माह दौरान गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी बनायें रखें। माह नवंबर में जिन गर्भवती महिलाओं की अनुमानित प्रसव तिथि है– चाहे वे सामान्य हो या जोखिम श्रेणी में उनका साप्ताहिक वर्गीकरण कर सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जाये। दूरस्थ क्षेत्र अथवा जोखिम वाली गर्भवती को 4 से 5 दिन पूर्व नजदीकी बर्थ वेटिंग हॉल में भर्ती कर गर्भावस्था से जुड़ी गुणात्मक स्वास्थ्य देखभाल कर सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाये। इसके पूर्व जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रीता चटर्जी ने बताया कि माह नवम्बर में किस प्रकार हर गर्भवती महिला की स्वास्थ्य पर निगरानी रखकर सुरक्षित प्रसव कराया जाये। इस पर विस्तार से जानकारी दी गई। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चौहान ने टीकाकरण अभियान का संचालन किस तरह से किया जाना है, इसकी जानकारी मौजूद मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों से साझा की गई।
