
कहा– कानून से ऊपर कोई नहीं, फिर चाहे वह वर्दी में हो या सत्ता में
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के एक थाने के एसएचओ गुलाब सिंह सोनकर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की वर्दी न्यायपालिका या कानून से ऊपर नहीं है, और किसी भी अधिकारी को न्याय की धारा को दूषित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अब इस मामले की सुनवाई 07 नवंबर को की जाना तय की गई है।
दरअसल, मामला उस समय गंभीर हो गया जब एसएचओ ने न केवल कोर्ट के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया, बल्कि कथित तौर पर यह तक कह दिया, कि मैं किसी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानूंगा, मैं तुम्हारा सारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट निकाल दूंगा। यह बयान उन्होंने उस याचिकाकर्ता से कहा, जिसकी गिरफ्तारी पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की डबल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 28 मार्च 2025 को सुरक्षा आदेश जारी होने के बावजूद, एसएचओ ने 23 अप्रैल को उन्हें उनके कार्यस्थल से घसीटते हुए गिरफ्तार किया और मारपीट भी की। जब उन्होंने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रति दिखाई, तब भी एसएचओ ने गालियां देते हुए कोर्ट के आदेश का अपमान किया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही उत्तर प्रदेश के गृह विभाग को इस घटना की जांच के आदेश दे चुका था। यह जांच एडीजीपी रैंक से नीचे के अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती थी। इस पर जो रिपोर्ट पेश की गई उसमें पुष्टि हुई कि एसएचओ ने जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना की थी। इस पर कोर्ट ने कहा, यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि प्रतिवादी द्वारा न्यायालय की अवमानना की गई है। ऐसे मामलों से सख्ती से निपटना आवश्यक है, ताकि कानून का सम्मान कायम रहे।
इस पर राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में पेश वकील ने आश्वस्त किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित एसएचओ के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस संबंध में अद्यतन जानकारी देने के लिए समय की मांग की। इस पर कोर्ट ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार किया और मामले की अगली सुनवाई 7 नवंबर 2025 को तय कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं, फिर चाहे वह वर्दी में हो या सत्ता में।
