
नई दिल्ली। आवारा कुत्तों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख दिखाया। अदालत ने सोमवार को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को रिपोर्ट पेश कर वास्तविकता से अवगत कराने को कह दिया है। पिछली सुनवाई 27 अक्टूबर को हुई थी, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को छोड़ अन्य किसी भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने अपना पक्ष नहीं रखा था, जिस पर कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाकर अन्य राज्यों की तरह दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को पेश होने का निर्देश दिया है।
दिल्ली में कुत्तों की स्थिति को लेकर मुख्य सचिव राजीव वर्मा जिन्होंने कुछ दिन पहले ही कार्यभार संभाला है, उन्होंने एमसीडी कमिश्नर अश्विनी कुमार से रिपोर्ट मांगी है। एमसीडी के पास स्ट्रीट डॉग की संख्या को लेकर कोई भी नई रिपोर्ट नहीं है। साल 2009 में हुई गणना में दिल्ली में करीब 5.6 लाख आवारा कुत्ते थे। विभिन्न अनुमानों और हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, वर्तमान में संख्या करीब 8 से 10 लाख तक हो सकती है। वर्ष 2016 में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (अब एकीकृत एमसीडी का हिस्सा) द्वारा चार ज़ोन में किए गए सर्वेक्षण में 1,89,285 कुत्तों की गणना की गई थी। इसकी पुष्टि एमसीडी कमिश्नर भी करते हैं, इसके बाद कुत्तों की गणना नहीं हुई।
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के पास कई सालों से आवारा कुत्तों की कोई आधिकारिक गणना नहीं है। पिछली गणना के बाद, अनुमानित संख्या में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 में हुई पिछली गणना में दिल्ली में लगभग 5.6 लाख आवारा कुत्ते थे। विभिन्न अनुमानों और हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, वर्तमान में यह संख्या लगभग 8 लाख से 10 लाख तक हो सकती है। स्ट्रीट डॉग को लेकर काम कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल भी कोर्ट में बता चुके हैं कि दिल्ली में कम से कम 8 लाख से अधिक स्ट्रीट डॉग हो सकते है।
