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इन्दौर। प्रथम प्रधान न्यायाधीश धीरेन्द्र सिंह ने पारिवारिक विवाद में भरण पोषण खर्च को लेकर एक मामले में सुनवाई उपरांत यह नजीर देते कि शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति भरण-पोषण संबंधी बाध्यता से नहीं बच सकता है। पति को आदेश दिया कि वह पत्नी को 20,000 रुपए प्रतिमाह, कोर्ट खर्च तथा बकाया राशि 4,00,000 रुपए भी अदा करेगा। प्रकरण कहानी अधिवक्ता केपी माहेश्वरी के अनुसार संक्षेप में इस प्रकार है कि संजय पारवानी ने वर्ष 2022 में प्रार्थी भाग्यश्री से विवाह किया और उन्हें एक पुत्री होने के बाद शारीरिक, मानसिक प्रताड़ना देकर शक-सुबाह का व्यवहार किया और बेडरूम में भी कैमरे लगाने लगा तथा मारपीट करके पुत्री को छीनकर उसको घर से बेघर कर दिया। पत्नी ने एफआईआर कराने के बाद न्यायालय को बताया साउथ अमेरिका में व्यवसायरत पति के पास कई मकान व गोदाम हैं। सुनवाई दौर पति ने कोर्ट में मारपीट या दहेज से इंकार कर बताया पत्नी शिक्षिका है और कोचिंग चलाती है। उसे किराए से भी आय है। वहीं उसका व्यापार बंद हो गया है और वह ट्रांसपोर्ट पर 20,000 रुपए प्रतिमाह की नौकरी करता है। कोर्ट ने पाया कि पत्नी द्वारा ट्यूशन करने एवं ब्यूटी पार्लर से किराए आय बाबद तर्क प्रमाणित नहीं है। पत्नी अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है। वहीं पति ने जो ट्रांसपोर्ट की नौकरी का वेतन पत्रक पेश किया है, वह उल्हास नगर के पते का है। इंदौर के ट्रांसपोर्ट का नहीं होकर विश्वसनीय नहीं है, जबकि पति ने नौकरानी का वेतन, माता-पिता का खर्च और स्वयं का सामान्य खर्च 58,000 रुपए प्रतिमाह बताया। कोई भी व्यक्ति आय का एक-तिहाई भाग ही खर्च करता है। इस कारण नौकरी की आय का तर्क झूठा है, वह पर्याप्त साधनों वाला व्यक्ति है और पत्नी के भरण-पोषण में उपेक्षा कर रहा है, उसने अपनी पत्नी के विरूद्ध कम्बल और मोबाइल चोरी का झूठा आरोप लगाया व पुलिस जूनी इंदौर ने गिरफ्तार किया तथा कोर्ट से उसकी जमानत हुई।

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