
सीजेआई गवई ने एक कार्यक्रम में पीएम मोदी की मौजूदगी में कही यह बात
नई दिल्ली। सीजेआई बी आर गवई ने कहा है कि न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि हरेक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जजों और वकीलों का यह कर्तव्य है कि वे तय करें कि न्याय का प्रकाश समाज के हाशिये पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। कानूनी सहायता वितरण तंत्र को मजबूत करने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के बोले हुए जस्टिस गवई ने कहा कि कानूनी सेवा आंदोलन का असली पुरस्कार आंकड़ों या वार्षिक रिपोर्ट में नहीं है, बल्कि उन नागरिकों की शांत कृतज्ञता और नए सिरे से विश्वास में है, जो कभी खुद को अनदेखा महसूस करते थे।
सीजेआई ने कहा कि न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि हरेक नागरिक का अधिकार है और न्यायाधीशों, वकीलों और अदालत के अधिकारियों के रूप में हमारी भूमिका यह तय करने की है कि न्याय का प्रकाश समाज के हाशिये पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। गवई ने कहा कि पीएम मोदी की उपस्थिति कानूनी सहायता और सभी के लिए न्याय तक पहुंच को आगे बढ़ाने में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की साझा जिम्मेदारी की पुष्टि करती है।
उन्होंने कहा कि सफलता का असली मापदंड संख्या में नहीं बल्कि आम आदमी के विश्वास में है, इस विश्वास में कोई न कोई, कहीं न कहीं, उनके साथ खड़ा होने को तैयार है। गवई ने कहा कि और इसीलिए हमारा काम हमेशा इस भावना से निर्देशित होना चाहिए कि हम जीवन बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपकी एक दिन की उपस्थिति, किसी गांव या जेल का दौरा, संकटग्रस्त व्यक्ति से आपकी बातचीत, किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जीवन बदल देने वाली हो सकती है, जिसके लिए पहले कभी कोई मदद के लिए नहीं आया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानूनी सहायता को प्रतिक्रियात्मक प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत आंदोलन के रूप में देखा जाना चाहिए। पीएम मोदी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे, जिसमें केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, न्यायमूर्ति गवई के उत्तराधिकारी सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीश भी शामिल हुए।
