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मंडला में पदस्थ आईएफएस अधिकारी निथ्यानंतम एल होंगे दक्षिण सामान्य वन मंडल के नए डीएफओ
राज्य वन्य सेवा के अधिकारी रेशम सिंह धुर्वे होंगे उत्तर सामान्य वनमंडल के प्रभारी डीएफओ
बालाघाट। बाघ की रहस्य मौत और बगैर प्रोटोकाल के शव जलाने के मामले में विवादों में फंसे डीएफओ अधर गुप्ता और विधायक पर अवैध पैसों की मांग करने की शिकायत करने से चर्चा में आई डीएफओ नेहा श्रीवास्तव का प्रदेश सरकार ने तबादला कर दिया है। सोमवार को इसके आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
राज्य शासन द्वारा जारी आदेश अनुसार वर्ष 2016 बैच की आईएफएस अधिकारी नेहा श्रीवास्तव को उपवन संरक्षक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ भोपाल के पद पर प्रतिनियुक्ति में भेजा गया है। वहीं इसी बैच के आईएफएस अधिकारी और डीएफओ नेहा श्रीवास्तव के पति अधर गुप्ता को उप वनसंरक्षक कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख भोपाल के पद पर पदस्थ किया है। वहीं पश्चिम सामान्य मंडला में पदस्थ डीएफओ और वर्ष 2019 बैच के आईएफएस अधिकारी निथ्यानंतम एल को दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट के वन मंडलाधिकारी के रुप में पदस्थ किया गया है। इसी तरह राज्य वन्य सेवा के अधिकारी उपवन मंडल अधिकारी मनासा सामान्य नीमच रेशम सिंह धुर्वे को प्रभारी डीएफओ उत्तर बालाघाट सामान्य वनमंडल में पदस्थ किया गया है।
बाघ की मौत मामले में फंसे है डीएफओ गुप्ता
जानकारी के अनुसार दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट में पदस्थ डीएफओ अधर गुप्ता बाघ की रहस्यमय मौत व बगैर प्रोटोकाल के शव का अंतिम संस्कार करने के मामले में फंसे है। दरअसल, उनके कार्यकाल में सोनेवानी के कक्ष क्रमांक 44३ में 27 जुलाई को पोटुटोला नहर के पास नाले में मरा बाघ दिखाई दिया था। डिफ्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे के कहने पर सुरक्षा श्रमिक चौकीदारों ने 29 जुलाई को बाघ के शव को जलाकर नष्ट कर दिया था। २ अगस्त को यह मामला वाट्सएप के माध्यम से सामने आया। आनन-फानन में वनअमले ने इसकी जांच शुरू की। स्थानीय स्तर पर एसआईटी का गठन किया गया था। वनविभाग की टीम ने 8 आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। इस मामले में 6 आरोपी में सुरक्षा श्रमिक चौकीदार हरीलाल, शिवकुमार, शैलेष, अनुज, मानसिंह और देवसिंह को गिरफ्तार किया। जबकि निलंबित डिप्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे फरार हो गए थे, जिसमें से डिप्टी रेंजर टीकाराम हनोते को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि वनरक्षक हिमांशु घोरमारे अभी भी फरार चल रहे हैं। इस मामले की जांच एसटीएसएफ (स्टेट टाईगर स्ट्राईक फोर्स) कर रही है। एसटीएसएफ की जांच के बाद एसआईटी को भंग कर दिया गया था। इसी प्रकरण में डीएफओ अधर गुप्ता के खिलाफ विभाग ने १७० से अधिक पेजों का आरोप पत्र भी जारी किया है। इन आरोप पत्रों में डीएफओ गुप्ता को विभिन्न मामलों में दोषी पाया गया है।
विधायक की शिकायत कर चर्चाओं में आई डीएफओ श्रीवास्तव
डीएफओ नेहा श्रीवास्तव द्वारा बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे पर दो-तीन पेटी अवैध पैसों की मांग करने की शिकायत करने के बाद चर्चाओं में आई है। डीएफओ नेहा श्रीवास्तव ने 18 अगस्त को पीसीसीएफ भोपाल को पत्र लिखकर विधायक अनुभा मुंजारे पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि 16 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद उन्हें बालाघाट स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस बुलाया गया। शिकायत पत्र में उल्लेख है कि वहां विधायक ने निजी स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में 2-3 पेटी अवैध पैसों की मांग की। पैसे न देने पर विधायक ने कथित तौर पर न केवल उन्हें बल्कि उनके परिवार को भी अपमानजनक और असंयमित भाषा का शिकार बनाया। डीएफओ की शिकायत के बाद प्रदेश सरकार ने दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी में आईएफएस अधिकारी व अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक कमोलिका मोहन्ता और वन संरक्षक बैतुल वासु कनोजिया को शामिल किया गया था। दोनों ही अधिकारी 12 सितंबर को बालाघाट पहुंचे थे। दोनों अधिकारियों ने बंद कमरे में बयान दर्ज किए थे। फारेस्ट रेस्ट हाउस में डीएफओ अधर गुप्ता, डीएफओ नेहा श्रीवास्तव और एफआरएच के स्थायीकर्मी चुन्नीलाल ऐड़े और वाहन चालक मुरारीलाल कोरी के बयान दर्ज किए थे। इसके बाद विधायक मुंजारे सहित उनके समर्थकों, पीएसओ के भी बयान लिए गए थे। बयान लेने के बाद जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई थी। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने विधायक अनुभा मुंजारे को क्लीन चीट दे दी है।
डीएफओ अभिनव पल्लव पर भी शीघ्र हो सकती है कार्यवाही
ठेकेदार को आर्थिक रुप से लाभ पहुंचाने के मामले में विवादों में आए डीएफओ अभिनव पल्लव पर भी शीघ्र कार्यवाही हो सकती है। विभाग ने इस मामले में डीएफओ पल्लव के खिलाफ जांच कर आरोप पत्र भी जारी कर दिया है। लेकिन अभी तक इस मामले में कार्यवाही नहीं हो पाई है। उल्लेखनीय है कि ठेकेदार को नियम विरुद्ध भुगतान और कार्यादेश देने के मामले में डीएफओ अभिनव पल्लव फंस हुए है। डीएफओ ने एक ही ठेकेदार (एवन कंस्ट्रक्शन कंपनी) पर मेहरबानी दिखाई थी। ठेकेदार को नियम विरुद्ध सप्लाई और नल कूप खनन का आर्डर दे दिया था। इतना ही नहीं संबंधित कार्यों का भुगतान भी कर दिया। इस मामले की शिकायत वन सुरक्षा समिति लामटा के अध्यक्ष शत्रुघ्न असाटी ने की थी। शिकायत के आधार पर मामले की जांच की गई। जांच में शिकायत सही पाई गई है। जांच समिति ने जांच प्रतिवेदन संबंधित अधिकारी को सौंप दिया है। विदित हो कि जांच में पाया गया था कि जून 2023 में 13 नलकूप खनन कार्य के आदेश दिए गए थे। जिसमें से 7 नलकूप खनन कार्यों का 7 लाख 75 हजार 800 रुपए का भुगतान एक वर्ष बाद 27 जून 2024 को किया गया था। वर्ष 2021-22 में बगैर निविदा के एवन कंस्ट्रक्शन कंपनी को पुरानी दर पर ही मार्च 2023 तक सामग्री प्रदान किए जाने का ठेका दिया गया। वर्ष 2023-24 में जेम पोर्टल में बिड टेंडर 31 लाख रुपए का था। लेकिन 1 करोड़ 87 लाख 89 हजार रुपए (जिसमें सामग्री 1 करोड़ 31 लाख 52 हजार रुपए और मजदूरी 56 लाख 37 हजार रुपए) में ही 18 निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदार से सामग्री क्रय करना दिखाया गया है, जो कि बिड टेंडर राशि से काफी अधिक है। वर्ष 2024-25 के लिए पुराने दर पर ही ठेका की अवधि बढ़ा दी गई। इस तरह से डीएफओ अभिनव पल्लव ने एक ही ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की मंशा से कार्यादेश जारी किए थे। इसी मामले में डीएफओ पल्लव पर कार्यवाही की तलवार लटकी है।

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