Spread the love

एक साथ कई धमाके, फायरिंग से करना था कत्लेआम ………200 बमों से 26/11 जैसे हमले की थी साजिश
नई दिल्ली। दिल्ली धमाके को लेकर अब नए खुलासे हो रहे हैं। रिपोट्र्स के मुताबिक, आतंकियों की 200 बम से 26/11 जैसे हमले की साजिश थी। दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद को निशाना बनाया जाना था। दिल्ली के लाल किला, इंडिया गेट, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और गौरी शंकर मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को चुना था। इनके अलावा, देशभर के रेलवे स्टेशनों और बड़े मॉल्स भी टारगेट पर थे।
सूत्रों के मुताबिक, यह साजिश जनवरी से ही चल रही थी। आतंकी मॉड्यूल का संबंध पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद संगठन से बताया जा रहा है। आतंकी पिछले कई महीनों से 200 बम बनाने की तैयारी कर रहे थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों का मकसद धार्मिक स्थलों पर हमला कर देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाना था। इसके लिए उन्होंने कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और अनंतनाग के कुछ डॉक्टरों को चुना, ताकि वे बिना रोकटोक कहीं भी जा सकें।
गुरुग्राम में मुंबई अटैक जैसा सुरक्षा प्लान बना
दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर की शाम हुए ब्लास्ट में गुरुग्राम और फरीदाबाद पुलिस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हरियाणा पुलिस के एक सीनियर अफसर ने बताया कि इस आतंकी मॉड्यूल ने 200 से ज्यादा पावरफुल बम तैयार करनी थी। इसीलिए 2900 किलो विस्फोटक के साथ टाइमर व बम बनाने वाली अन्य चीजें लाई गईं थी। यह भी पता चला है कि यह आतंकी मुंबई में 26/11 हमले की तर्ज पर बड़े धमाकों की प्लानिंग में थे। जिसमें एक साथ कई शहरों में सिर्फ धमाके ही नहीं करने थे बल्कि एके-56 व एक-47 जैसी राइफल से पब्लिक प्लेस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर लोगों का कत्लेआम करना था। यही नहीं, इन्होंने हाईप्रोफाइल टारगेट्स के साथ अस्पतालों को भी निशाना बनाना था ताकि धमाके और फायरिंग की सूरत में एकदम से मेडिकल मदद न मिल सके। इससे मैक्सिमम केजुअल्टी होगी। इस खुलासे के बाद गुरुग्राम पुलिस ने मुंबई हमले जैसी सिक्योरिटी एसओपी तैयार कर ली है। जिसके जरिए भीड़भाड़ वाली जगहों से लेकर अस्पतालों तक की निगरानी भी बढ़ाई गई है।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश थे टारगेट
पुलिस जांच में पता चला कि इस आतंकी मॉड्यूल के टारगेट पर सिर्फ दिल्ली नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश भी था। हरियाणा पुलिस के एक सीनियर अफसर ने बताया कि दिल्ली में इनकी प्लानिंग लाल किला, इंडिया गेट, कांस्टीट्यूशन क्लब के अलावा यूपी में धार्मिक स्थलों को खासतौर पर निशाना बनाने की प्लानिंग थी, ताकि साम्प्रदायिक तनाव भडक़ सके। पुलिस जांच के मुताबिक यह मॉड्यूल पूरी प्लानिंग के साथ काम कर रहा था। डॉक्टरों वाले इस व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल का बेस जानबूझकर फरीदाबाद में बनाया गया। यहां ये लोग अल फलाह यूनिवर्सिटी में जॉब भी करते थे, इसलिए किसी को शक होने की गुंजाइश नहीं थी।
सुसाइड कार बॉम्बिंग जैसा हमला नहीं था
सूत्रों के अनुसार, कार ने किसी टारगेट को टक्कर नहीं मारी, न किसी बिल्डिंग में घुसी, यानी यह सुसाइड कार बॉम्बिंग जैसा हमला नहीं था। उमर विस्फोट में मारा जा चुका है। पुलिस ने उसकी मां का डीएनए सैंपल लिया है, ताकि धमाके के अवशेष में मिले शव के टुकड़ों की पहचान हो सके। लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास सोमवार शाम करीब 6.52 बजे सफेद आई 20 कार में ब्लास्ट हुआ था। इसमें 12 लोगों की मौत हुई। सूत्रों का कहना है कि कार में विस्फोट सामाग्री वही थी, जो फरीदाबाद से 10 नवंबर को धमाके से पहले जब्त की गई थी।
शादी में बना आतंकियों का ग्रुप
दिल्ली में लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए धमाके के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का नया वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल (आतंकियों का ग्रुप) उजागर हुआ है। इस मॉड्यूल में डॉक्टर, प्रोफेसर और महिला सदस्य शामिल थे, जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क मेडिकल प्रोफेशन और शैक्षणिक संस्थानों की आड़ में काम कर रहा था, और हरियाणा के फरीदाबाद, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा और यूपी के सहारनपुर सहित कई इलाकों से जुड़ा था। इसकी शुरुआत धमाके से 37 दिन पहले 4 अक्टूबर को सहारनपुर में एक शादी से हुई थी। इसके बाद ग्रुप ने फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर, हथियार, विस्फोटक और फंडिंग के नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। सुरक्षा एजेंसियों को कश्मीर में 19 अक्टूबर को जैश के पोस्टर दिखने से मॉड्यूल के एक्टिव होने का सुराग मिला। जांच में सामने आया कि नेटवर्क की सबसे अहम महिला सदस्य डॉ. शाहीन सईद थी। वह जैश सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर से जुड़ी थी।
4 अक्टूबर को एक्टिव हुआ था मॉड्यूल
जांच में पता चला कि यह मॉड्यूल 4 अक्टूबर को एक्टिव हुआ था, जब सहारनपुर में डॉ. आदिल की शादी डॉ. रुकैया से हुई थी। शादी में कुछ ‘खास मेहमान’ शामिल थे, जिनकी पहचान एजेंसियां कर रही हैं। शादी के अगले दिन इस मॉड्यूल ने काम शुरू किया। इसका मकसद फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर लगाना, हथियारों की सप्लाई और पैसों का इंतजाम करना था। डॉ. आदिल लॉजिस्टिक और फाइनेंशियल चैनल संभालता था। नेटवर्क का प्लान था कि मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में फंडिंग और ट्रांसपोर्टेशन चैनल बनाए जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *