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केंद्र को 4 हफ्ते में नियम बनाने को कहा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सोशल मीडिया, ऑनलाइन शो और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते अश्लील या आपत्तिजनक कंटेंट पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर डाले जाने वाले एडल्ट या अश्लील कंटेंट की जिम्मेदारी किसी न किसी को लेनी ही होगी, क्योंकि जब तक ऐसे पोस्ट को रोका जाता है, तब तक लाखों लोग इसे देख चुके होते हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह चार हफ्तों के भीतर कठोर रेगुलेशन तैयार करे, जो एससी/एसटी एक्ट जितने सख्त हों।
कोर्ट ने यह टिप्पणी ऑनलाइन कंटेंट से जुड़े दो अलग-अलग मामलों (अश्लील कंटेंट विवाद और दिव्यांगों के अपमान) की सुनवाई के दौरान की।
अश्लील कंटेंट विवाद: रैना और रणवीर पर कई एफआईआर
इंडियाज़ गॉट लेटेंट शो का एक फरवरी में प्रसारित एपिसोड चर्चा में है, जिसमें स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना और अन्य कलाकारों ने कथित रूप से महिलाओं और पेरेंट्स के बारे में अशोभनीय टिप्पणियां की थीं। इस एपिसोड के बाद समय रैना, रणवीर अलाहबादिया और अन्य के खिलाफ देश के कई राज्यों में एफआईआर दर्ज हुईं। रणवीर अलाहबादिया ने इन्हीं एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने किसी तरह की राहत देने से इनकार किया, लेकिन केंद्र को सख्त कानून बनाने का निर्देश दिया ताकि भविष्य में ऐसा कंटेंट रोकने के लिए स्पष्ट और मजबूत तंत्र मौजूद हो।
दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का मामला
इसी शो में समय रैना पर दिव्यांगों विशेषकर नेत्रहीन लोगों का मजाक उड़ाने का आरोप भी लगा था। एसएमए फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना, विपुल गोयल, बलराज सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर को निर्देश दिया कि वे अपने शो में दिव्यांग व्यक्तियों की प्रेरक सफलता की कहानियां दिखाएं, जिससे उनके लिए फंड जुटाया जा सके। इस पर कॉमेडियन्स ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वे हर महीने ऐसे दो शो करेंगे और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए फंड एकत्र करेंगे।
सीजेआई ने फटकारा: बहुत सावधान रहना होगा
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने समय रैना को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें और उनकी टीम को भविष्य में बेहद सावधान रहना होगा। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट को यह भी जानकारी है कि मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद समय ने कनाडा में एक शो के दौरान टिप्पणी की थी कि इस विवाद से उनके वकीलों की फीस निकल आई। सीजेआई ने कहा, आप चाहे देश में हों या विदेश में, आपकी टिप्पणियों पर सभी की नजर रहती है। भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऑनलाइन कंटेंट रेगुलेशन को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में सरकार द्वारा तैयार किए जाने वाले नए नियम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।

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