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दमोह। न्यायाधीश संतोष कुमार गुप्ता की अदालत ने गंभीर मारपीट के एक मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए भादवि की विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग अवधि के कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में म.प्र शासन की ओर से पैरवी सरकारी वकील राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई। अदालत ने आरोपी नरेंद्र उर्फ बाबू (21) पिता चन्नू अहिरवार को भादवि की धारा 326 के तहत तीन वर्ष का सश्रम कारावास, आरोपी रामू (29) पिता चन्नू अहिरवार को धारा 324 के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास तथा आरोपी वीरेंद्र उर्फ वीरू (24) पिता शंकर अहिरवार को धारा 323 के अंतर्गत पूर्व से जेल में बिताए 73 दिवस के कारावास से दंडित किया। साथ ही सभी आरोपियों पर कुल 2 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अभियोजन के अनुसार, घटना दिनांक 6 फरवरी 2023 की है। थाना पथरिया अंतर्गत ग्राम सेमरा हजारी निवासी मोहन अहिरवार गांव में कथा सुनकर शाम करीब 7 बजे घर लौट रहा था। रास्ते में उसे आरोपी नरेंद्र उर्फ बाबू अहिरवार बीड़ी पीते हुए मिला। मोहन द्वारा बीड़ी पीने से मना करने पर नरेंद्र ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। मोहन के चिल्लाने पर उसके रिश्तेदार रामेश्वर, बृजेश, महारानी और लखन मौके पर पहुंचे। तभी आरोपी नरेंद्र का भाई रामू तथा रिश्तेदार वीरेंद्र उर्फ वीरू वहां आए और कुल्हाड़ी, लाठी व लात-घूंसों से सभी के साथ मारपीट की। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। मारपीट में घायल सभी लोग इलाज के लिए पथरिया अस्पताल पहुंचे, जहां पुलिस ने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज की। विवेचना उपरांत प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत हुआ। अभियोजन पक्ष ने मामले में 12 साक्षी प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सभी साक्षी आपस में रिश्तेदार हैं, उनके कथनों में विरोधाभास है तथा पूर्व से बुराई होने के कारण आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। इस पर न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि मात्र साक्षियों के रिश्तेदार होने से पूरे मामले को झूठा नहीं माना जा सकता। बुराई के आधार पर अभियोजन साक्ष्य को अविश्वसनीय ठहराना उचित नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इतनी गंभीर चोटों के बाद वास्तविक अपराधियों को छोड़कर किसी अन्य को झूठा फंसाने की संभावना नहीं रहती। साक्ष्यों में मामूली विरोधाभास समयांतराल, स्मरण शक्ति और निरीक्षण क्षमता के अंतर के कारण स्वाभाविक हैं। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उपरोक्त सजा सुनाई।

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