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ईडी की कार्रवाई के बाद एसीबी ने दर्ज की एफआईआर, नकदी, फाइलें और दलालों की सूची बरामद
सुरेन्द्रनगर| ज़िले में बड़े पैमाने पर ज़मीन को गैर-कृषि (एनए) में बदलने के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। लगभग 1500 करोड़ रुपये के इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 दिसंबर की सुबह-सुबह कलेक्टर डॉ. राजेंद्रकुमार पटेल, डिप्टी मामलतदार चंद्रसिंह मोरी सहित अन्य अधिकारियों के आवासों पर छापे मारे थे। इन छापों के दौरान डिप्टी मामलतदार के घर से 67.50 लाख रुपये की नकद राशि बरामद हुई, जबकि कलेक्टर के सरकारी बंगले से करीब 100 संदिग्ध फाइलें जब्त की गईं। ईडी की जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में ज़मीन को अवैध रूप से गैर-कृषि घोषित कर सोलर प्लांट और अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए बेचा जा रहा था। इसके लिए अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर रिश्वत ली जाती थी। एक करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप में डिप्टी मामलतदार चंद्रसिंह मोरी को ईडी ने गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। अब इस घोटाले में ईडी की शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सुरेंद्रनगर के कलेक्टर डॉ. राजेंद्रकुमार पटेल, डिप्टी मामलतदार चंद्रसिंह मोरी, कलेक्टर के निजी सहायक (पीए) जयराजसिंह झाला और क्लर्क मयूर गोहिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और रिश्वत के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। इस कार्रवाई के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से कलेक्टर राजेंद्र पटेल को पद से हटाकर उनकी सेवाएं सामान्य प्रशासन विभाग को सौंप दी हैं और जिला विकास अधिकारी को कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सुरेंद्रनगर एसीबी कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जांच तेज़ी से जारी है। कार्यालय के दरवाज़े बंद कर विस्तृत जांच की जा रही है। फिलहाल अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच में और भी बड़े नामों की संलिप्तता सामने आ सकती है। घोटाले में दलालों के नाम और कमीशन का विवरण लिखे कागज़ भी मिले हैं, जिससे जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

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