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कार्यकाल के दौरान बोर्ड को लगाया करोड़ो का चूना – 185 संपत्तियो को कम किराये पर दिया

नियमो को दरकिनार कर नये पट्टे दिये, कराया पक्का निर्माण
भोपाल। वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों को नियम विरुद्ध तरीके से किराए पर देकर बोर्ड को करोड़ो की आर्थिक क्षति पहुँचाने के मामले में ईओडब्ल्यू ने पूर्व कमेटी के अध्यक्ष शौकत मोहम्मद खॉन सहित सचिव फुरकान अहमद और सह सचित मोहम्मद जुबेर के खिलाफ चार सौ बीसी सहित अन्य धाराओ में मामला दर्ज किया है। जॉच में सामने आया की आरोपियो ने वक़्फ़ बोर्ड को 2 करोड़ 54 लाख रुपये की क्षति पहुंचाई। शासन से प्राप्त रिपोर्ट पर जाँच के बाद ईओडब्ल्यू ने कार्यवाही की है।

  • 2023 में मिली थी शिकायत
    विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार इस संबध में उप सचिव,मध्यप्रदेश शासन,सामान्य प्रशासन विभाग 27 जुलाई 2023 को भेजे गए पत्र के माध्यम से शिकायत मिली थी। जिसके साथ वक्फ बोर्ड से संबंधित दस्तावेज़ और पूर्व की जांच समिति की रिपोर्ट भी संलग्न थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था, कि वक्फ बोर्ड की औकाफ आम्मा संपत्तियों को नियमो का उल्लंघन करते हुए लीज पर दिया गया। और बिना अनुमति निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • जॉच में सामने आया करोड़ो का नुकसान
    शिकायत मिलने पर ईओडब्ल्यू ने 3 अक्टूबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि सैकड़ों वक्फ संपत्तियों को नियमों की अनदेखी कर जिन 185 संपत्तियों को किराये पर दिया गया,उनका कुल क्षेत्रफल लगभग 83 हजार वर्गफुट है। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 59 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। नियमों के मुताबिक इनसे हर साल लगभग 2 करोड़ 98 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए था। लेकिन वास्तव में केवल 21 लाख रुपये के आसपास का ही वार्षिक किराया वसूला गया। इस तरह वक्फ को हर साल करीब 2 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक हानि हुई।
  • गड़बड़ियों की जड़ समिति के कार्यकाल से जुड़ी
    आगे की जांच में पता चला की वक्फ संपत्तियों में हुई गड़बड़ियों की जड़ प्रबंध समिति के कार्यकाल के दौरान किए गए अनियमित निर्णयों से जुड़ी है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा दिनांक 14 अगस्त 2013 को इंतजामिया कमेटी औकाफ आम्मा, भोपाल का गठन किया गया था। यह एक 11 सदस्यीय समिति थी। इस समिति के अध्यक्ष शौकत मोहम्मद खान बनाए गए थे,जबकि फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर सचिव पद पर कार्यरत थे। इस समिति का कार्यकाल पाँच साल वर्ष का था,जो 13 अगस्त 2018 तक निर्धारित था।
  • समिति ने लिये मनमाने फैसले
    समिति के गठन आदेश में वक्फ बोर्ड ने साफ-साफ शर्तें तय की थीं। की वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 51 के तहत वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना किसी भी वक्फ संपत्ति को न तो लीज पर दिया जा सकता है,न बेचा जा सकता है,न ही किसी अन्य रूप में हस्तांतरित किया जा सकता है। और बोर्ड की अनुमति के बिना वक्फ संपत्ति में कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद भी समिति के कार्यकाल,विशेष रूप से 2013 से 2018 के बीच वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में बड़े पैमाने पर किरायेदारी परिवर्तन किए गए। जांच के अनुसार लगभग 185 मामलों में किरायेदारी बदली गई। इन परिवर्तनों को कागजों में किरायेदारी परिवर्तन बताया गया, जबकि वास्तविकता में पुराने किरायेदारों को हटाकर नए लोगों को नए पट्टे(लीज) दे दिए गए।
  • किसी भी फैसले में ने सार्वजिनक सुचना और न आवेदन आमंत्रित
    जांच में यह भी पाया गया कि ये किरायेदारी परिवर्तन बिना किसी सार्वजनिक सूचना,बिना आवेदन आमंत्रित किए और बिना वक्फ बोर्ड की स्वीकृति के किए गए। जहां नियमों के अनुसार पहले पुरानी किरायेदारी को सरेंडर कर नई प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी,वहां सीधे नाम बदलकर संपत्तियां दे दी गई। कुछ मामलों में किरायेदारी बदलने के लिए रक्त संबंध (ब्लड रिलेशन) का आधार भी दिखाया गया,जो जांच में सही नहीं पाया गया। इन मामलों में वक्फ संपत्ति पट्टा नियमो का खुला उल्लंघन किया गया। नियमों के अनुसार संपत्तियां देने से पहले सार्वजनिक नोटिस जारी करना,अखबारों में विज्ञापन देना,अधिक किराया देने वाले को प्राथमिकता देना और बोली प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य था। लेकिन इन प्रक्रियाओं में से किसी का भी पालन नहीं किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई संपत्तियों पर बिना अनुमति स्थायी निर्माण करवा दिया गया।
  • हर साल हुआ नुकसान
    जांच में खुलासा हुआ की 185 वक्फ संपत्तियों में यह बदलाव किए गए। उन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 59 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक थी। नियमों के अनुसार इन संपत्तियों से हर साल करीब 2 करोड़ 76 लाख रुपये का किराया मिलना चाहिए था, जबकि मिला 21 लाख के आसपास। इस तरह से तत्कालीन मुतवल्ली शौकत मोहम्मद,सचिव फुरकान अहमद और सह-सचिव मोहम्मद जुबेर के फैसलो से वक्फ बोर्ड को लगभग 2 करोड़ 54 लाख 7 हजार 119 रुपये की आर्थिक क्षति हुई। जबकि निजी व्यक्तियों को अनुचित रूप से लाभ पहुंचाया गया। जांच के आधार पर शौकत मोहम्मद खॉन, फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर के खिलाफ धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग, 420(धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओ के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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