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दमोह। म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन मुख्यालय तथा दमोह इकाई के संयुक्त तत्वावधान में देश के अविस्मरणीय गीतकार गोपालदास नीरज जन्मशती “यादों में नीरज“ समारोह होटल मंगलम के सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सत्यमोहन वर्मा, मुख्य अतिथि ख्यात नवगीतकार यश मालवीय प्रयागराज, विशिष्ट अतिथि डॉ. भारती सिंह लखनऊ रहीं। कार्यक्रम के सूत्रधार प्रदेश अध्यक्ष पलाश सुरजन रहे। दीप प्रज्जवलन व अतिथि सत्कार उपरांत भारती सिंह ने कहा कि कवि नीरज तथा उनका गीत रचना संसार एक विद्यालय की तरह था और आज भी है। जिसमें लोगों को उनके द्वारा सिखाया गया और लोग सीख भी रहे है। उनके समग्र गीत लेखन में गंभीर दृष्टि डालने से पता चलता है कि उन्होने भाषाओं का सम्मिश्रण कर गीत लिखे, जिसमें साहित्य, सौंदर्य का बोध सहज ही श्रोता एवं पाठक को हो जाता है। रचना उद्देश्य से संदेश तक की पूर्ति उनकी रचनाओं में समाहित है। मुख्य अतिथि यश मालवीय ने कहा कि मैं नीरज को यादकर, अपने पिता को यादकर रहा हूं, क्योंकि नीरज ने मुझे सिखाया है बनाया है।

उन्होने ही यह सडक बनाई, हमे उस पर चलना सिखाया जिस पर मैं और अन्य रचनाकार चल रहे है। सृष्टि में जहां तक मुनष्य है, जीवन है, वहां तक के समस्त आयामों का चित्रांकन नीरज के गीत लेखन में समाया हुआ है। अध्यक्ष सत्यमोहन वर्मा ने कहा कि नीरज के स्मरण में कितना कहूं क्या कहूं, क्योंकि उनके गीत संसार को कहना उसी तरह से है जैसे दीवार की एक छोटी सी खिडकी से भीड़ को निकलने को कहा जाये। दमोह की धरती पर 1957 में पहली बार महाविद्यालय में पधारे थे। जिसमें उन्होने गीतों की विलक्षण प्रस्तुती दी थी, संपूर्ण जीवन वे शब्दों की महायात्रा करते रहे। प्राणपन से इस यात्रा को उन्होने पूरा किया।

इस यात्रा का उनका एकमेव उद्देश्य एवं हम सबको संदेश था कि मैं कविता मनुष्य बनकर जानना चाहता हूं यही मेरा आदि है, यही मेरा अंत है। नीरज ने अपने गीतों में आम आदमी के दर्द को गाया है, कविता क्या है, गीत क्या है, हम सभी ने इसे नीरज से सीखा है। आज भी हम उनकी कविता की आत्मा के अंश को अपनी कविता में समाहित करे। जिससे कविता की सार्थकता सिध्द हो सके। आप सभी से निवेदन है कि उनकी रचनाएँ पढे। मैं संपूर्ण हृदय से श्रृध्दाभाव समपित करता हूं। विधायक जयंत मलैया, कलेक्टर सुधीर कोचर जी की उपस्थिति सराहनीय रही।

कार्यक्रम में नगर के कवि, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार और गणमान्य नागरिकों की बहुत संख्या में उपस्थिति रही। नीरज को समर्पित देश के ख्याति लब्ध कवि, शायर सीमा अग्रवाल मुंबई, इंदु श्रीवास्तव, अभय तिवारी, कुंदन सिध्दार्थ जबलपुर, बद्रवास्ती, अभिषेक वर्मा, रेखा कस्तवार, सुरेश गुप्ता भोपाल, राजकुमार महोबिया, संतोष द्विवेदी, कुलदीप द्विवेदी उमरिया, विभूति तिवारी शहडोल, दीपक अग्रवाल अनूपपुर, रोहित रूसिया छिंदवाडा, किशोर तिवारी ’केशू’ दमोह ने रचना पाठ किया।

विवेक चतुर्वेदी जबलपुर ने सफल संचालन किया। रचना पाठ के पूर्व अतिथियों द्वारा यादों में नीरज स्मारिका का विमोचन किया जाकर सबको प्रदान की गई। दमोह इकाई अध्यक्ष रमेश तिवारी द्वारा स्वागत वक्तव्य, सचिव मानव बजाज द्वारा आभार ज्ञापित किया गया।

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