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सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सभी याचिका पर सुनाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में लगातार दाखिल हो रही बड़ी संख्या में याचिकाओं को लेकर हैरानी जाहिर की है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने टिप्पणी की कि आमतौर पर इंसानों से संबंधित मामलों में भी इतनी अधिक अंतरिम अर्जियां दाखिल नहीं होतीं, जितनी आवारा कुत्तों के मुद्दे पर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अदालत के लिए भी आश्चर्यजनक है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने तब की, जब दो वकीलों ने उनके समक्ष आवारा कुत्तों से जुड़ा मामला उठाया। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि उन्होंने इस प्रकरण में अंतरिम आवेदन दाखिल किया है। इस पर न्यायमूर्ति मेहता ने हल्के लहजे में कहा कि इंसानों के मामलों में भी इतनी याचिकाएं देखने को नहीं मिलतीं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि वह मामले की गंभीरता को समझती है और सभी पक्षों को सुना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बताया कि आवारा कुत्तों से संबंधित सभी याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई की जाएगी। जब एक अन्य वकील ने स्थानांतरण याचिका का उल्लेख किया, तब अदालत ने कहा कि बुधवार को कई याचिकाएं सूचीबद्ध हैं और सभी वकीलों को अपनी दलीलें रखने का पूरा मौका मिलेगा। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में “चिंताजनक वृद्धि” को देखते हुए पिछले वर्ष 7 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। अदालत ने आदेश दिया था कि आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित किया जाए और उन्हें वापस उसी स्थान पर न छोड़ा जाए, जहां से उन्हें पकड़ा गया हो।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे से मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने के भी निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि खेल परिसरों सहित संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं की पुनरावृत्ति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि यह प्रणालीगत विफलता का भी संकेत है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किया गया था, जो राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने और विशेष रूप से बच्चों में रेबीज फैलने से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर 28 जुलाई को दर्ज किया गया था।

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